बिहार के दरभंगा में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ा बयान दिया है। गुरुवार, 8 अक्टूबर को मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि ज्ञानेश कुमार पद से चले जाएं, क्योंकि उनके अनुसार चुनाव आयोग की विश्वसनीयता दांव पर लगी है।
प्रशांत किशोर ने हालांकि केवल CEC के इस्तीफे को समाधान नहीं बताया। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में व्यापक सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया।
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि पिछले कई वर्षों से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने मतदाता सूची तैयार करने, चुनाव की समय-सारिणी, आदर्श आचार संहिता और मतगणना जैसे मुद्दों का जिक्र किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन अलग-अलग स्तरों पर आयोग की भूमिका को लेकर जनता के बीच निष्पक्षता संबंधी सवाल पैदा हुए हैं। उनके मुताबिक इसी वजह से देश में चुनाव प्रक्रिया को लेकर विरोध-प्रदर्शन भी हो रहे हैं।
हालांकि, ये प्रशांत किशोर द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। चुनाव आयोग और बीजेपी विपक्ष द्वारा लगाए गए व्यापक आरोपों को खारिज करते रहे हैं। मौजूदा विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के प्रदर्शन भी जारी हैं।
‘सिर्फ ज्ञानेश कुमार के जाने से नहीं होगा समाधान’
प्रशांत किशोर ने कहा कि ज्ञानेश कुमार का जाना जरूरी है, लेकिन इससे आगे चुनाव आयोग में संस्थागत सुधार होना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया और वोटर लिस्ट तैयार करने की व्यवस्था में बदलाव की मांग की।

उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास तभी मजबूत होगा, जब मतदाता सूची से लेकर चुनाव और मतगणना तक पूरी व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता और भरोसा बढ़े।
राजीव कुमार का भी किया जिक्र
प्रशांत किशोर ने मौजूदा CEC ज्ञानेश कुमार से पहले पद पर रहे राजीव कुमार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजीव कुमार के कार्यकाल में भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठे थे।
उन्होंने राजीव कुमार के सेवानिवृत्ति के बाद निजी क्षेत्र में एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन बनने का जिक्र करते हुए सवाल उठाया। यह मुद्दा प्रशांत किशोर पहले भी सार्वजनिक रूप से उठा चुके हैं।
ज्ञानेश कुमार को लेकर पहले से चल रहा विवाद
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर पिछले कुछ समय से विपक्षी दलों का विरोध जारी है। SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। 8 अक्टूबर को भी दिल्ली में विपक्षी दलों के प्रदर्शन के दौरान यह मांग प्रमुख रही।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने हाल में ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने या निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार किया था। कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और कहा है कि केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती।
‘10 हजार नौकरी’ वाले बयान पर भी सफाई
मीडिया बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान रोजगार को लेकर दिए गए उनके बयान पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ते समय उन्होंने सरकारी नौकरी देने का वादा नहीं किया था।
उनके मुताबिक चुनाव जीतने के बाद उन्होंने अपने संपर्कों के माध्यम से निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने की कोशिश की। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि उनके कार्यालय में लोगों के CV जमा किए जा रहे हैं और युवाओं को निजी क्षेत्र में नौकरी दिलाने की प्रक्रिया चल रही है।
चुनाव सुधार को बताया बड़ा मुद्दा
दरभंगा में प्रशांत किशोर का बयान ऐसे समय आया है जब CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ रहा है। एक तरफ विपक्ष इस्तीफे की मांग कर रहा है, वहीं चुनाव आयोग और बीजेपी इन आरोपों को स्वीकार नहीं करते।
ऐसे माहौल में प्रशांत किशोर ने व्यक्तिगत इस्तीफे की मांग के साथ चुनाव आयोग की नियुक्ति व्यवस्था, मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया में व्यापक सुधार का मुद्दा भी उठाया। अब इस बहस का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव चुनाव आयोग और अदालतों के स्तर पर सामने आने वाले जवाब और फैसले होंगे।

