उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मेडिकल इंटर्नशिप कर रहे हजारों छात्र-छात्राओं को राहत देने वाला फैसला लिया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी के इंटर्न डॉक्टरों का मासिक भत्ता दोगुना हो जाएगा। इससे पढ़ाई के बाद अस्पतालों में सेवाएं दे रहे विद्यार्थियों को आर्थिक मदद मिलेगी।
योगी कैबिनेट ने दी स्टाइपेंड बढ़ाने की मंजूरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में इंटर्नशिप भत्ते में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस फैसले के तहत प्रदेश के राजकीय आयुर्वेदिक, यूनानी और होम्योपैथी मेडिकल कॉलेजों, संस्थानों तथा विश्वविद्यालयों से संबंधित पाठ्यक्रमों की परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थियों को अब अधिक भत्ता मिलेगा। सरकार के इस निर्णय से चिकित्सा क्षेत्र में प्रशिक्षण ले रहे युवाओं को आर्थिक सहारा मिलने की उम्मीद है।
₹7,500 से बढ़कर ₹15,000 हुआ मासिक भत्ता
अब तक बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस के इंटर्न विद्यार्थियों को हर महीने 7,500 रुपये स्टाइपेंड मिलता था। कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह राशि बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रतिमाह करने का निर्णय लिया गया है। यानी विद्यार्थियों को हर महीने 7,500 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। यह वृद्धि उन युवाओं के लिए राहत लेकर आई है, जो मेडिकल शिक्षा पूरी करने के बाद व्यावहारिक प्रशिक्षण के दौरान अपनी जरूरतों का खर्च भी संभालते हैं।

1,714 इंटर्न छात्र-छात्राओं को मिलेगा लाभ
इस फैसले से प्रदेश के कुल 1,714 इंटर्न विद्यार्थियों को लाभ मिलने की जानकारी दी गई है। इनमें आयुर्वेद के 588, यूनानी के 150 और होम्योपैथी के 976 छात्र-छात्राएं शामिल हैं। इन विद्यार्थियों के लिए बढ़ा हुआ भत्ता रोजमर्रा के खर्च, आवागमन और प्रशिक्षण से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में मददगार हो सकता है।
अस्पतालों में निभाते हैं अहम जिम्मेदारी
बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस की परीक्षा पास करने के बाद रोटेटिंग इंटर्नशिप करना अनिवार्य होता है। इस दौरान विद्यार्थी अस्पतालों में मरीजों के उपचार में चिकित्सकीय सहयोग करते हैं। वे ओपीडी, वार्ड और रात्रि ड्यूटी में भी जिम्मेदारियां निभाते हैं। ऐसे में इंटर्नशिप भत्ते में वृद्धि उनके प्रशिक्षण के दौरान आर्थिक दबाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मेडिकल विद्यार्थियों के लिए क्यों अहम है फैसला?
इंटर्नशिप चिकित्सा शिक्षा का वह चरण है, जहां विद्यार्थी किताबों में सीखे ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों में लागू करना सीखते हैं। इस दौरान अस्पतालों में नियमित उपस्थिति और मरीजों की देखभाल के बीच खर्च संभालना आसान नहीं होता। बढ़ा हुआ स्टाइपेंड उन्हें कुछ आर्थिक स्वतंत्रता दे सकता है। हालांकि, इस फैसले का वास्तविक असर भुगतान शुरू होने और विद्यार्थियों तक बढ़ी हुई राशि पहुंचने के बाद स्पष्ट होगा।

