उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच अखिलेश यादव अपनी समाजवादी पार्टी को मजबूत करने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में उन्होंने बीजेपी के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप और उनकी बेटी कीर्ति कश्यप को सपा में शामिल कराया है। इस कदम को बरेली और रुहेलखंड में पार्टी की पकड़ मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अखिलेश यादव का कहना है कि इन नेताओं के आने से उनकी पार्टी को इलाके में फायदा मिलेगा।
धर्मेंद्र कश्यप आंवला से बीजेपी के सांसद रह चुके हैं। बताया जा रहा है कि हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद वह पार्टी से नाराज थे। मंगलवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने दोनों का समाजवादी पार्टी में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र कश्यप और कीर्ति कश्यप के जुड़ने से बरेली और रुहेलखंड में PDA की ताकत बढ़ेगी। इसी दौरान अखिलेश ने कीर्ति कश्यप को विधानसभा चुनाव में टिकट देने का वादा भी किया।
समाजवादी पार्टी का PDA अभियान पिछड़े वर्गों दलितों और अल्पसंख्यकों को साथ लाने पर केंद्रित है। पार्टी की कोशिश है कि इन समुदायों के बीच अपना समर्थन बढ़ाया जाए और ज्यादा से ज्यादा लोगों को संगठन से जोड़ा जाए। इसके लिए अखिलेश यादव ऐसे नेताओं को पार्टी में जगह दे रहे हैं जिनका अपने इलाके और समुदाय में प्रभाव माना जाता है।
बीजेपी के साथ पहले काम कर चुके नेताओं का सपा में आना राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। खासकर गैर यादव पिछड़े वर्गों और गैर जाटव दलित समुदायों के नेताओं को जोड़ने की कोशिश पर नजर रखी जा रही है। इन समुदायों के एक हिस्से को बीजेपी का समर्थक माना जाता रहा है।
इससे पहले पूर्व IAS अधिकारी राम बहादुर पासी भी समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे। वह पहले बहुजन समाज पार्टी से जुड़े थे और 2017 में मोहनलालगंज सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। बाद में उन्होंने बसपा छोड़कर 2022 में बीजेपी का दामन थाम लिया था।
अब अखिलेश यादव के सामने चुनौती यह है कि नए नेताओं के आने से मिलने वाले राजनीतिक फायदे को वोटों में कैसे बदला जाए। बरेली और रुहेलखंड में PDA की यह रणनीति कितनी असरदार रहती है यह आने वाले चुनाव में साफ होगा।

