दिल्ली के PWD मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा से जुड़े थप्पड़ विवाद को लेकर आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच सियासी टकराव बढ़ता जा रहा है। AAP नेता सौरभ भारद्वाज और त्रिलोकपुरी विधायक जरनैल सिंह शिकायतकर्ता साहिब सिंह के साथ दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंचे और प्रवेश वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस ने उन्हें मुख्यालय के अंदर जाने से रोक दिया, जिसके बाद मौके पर पुलिस और AAP नेताओं के बीच बहस हुई।
पुलिस मुख्यालय के बाहर रोके गए सौरभ भारद्वाज
सौरभ भारद्वाज अपने समर्थकों और शिकायतकर्ता साहिब सिंह के साथ पुलिस मुख्यालय पहुंचे थे। AAP नेताओं का कहना था कि वे दिल्ली पुलिस कमिश्नर से मिलकर प्रवेश वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग करना चाहते हैं।
हालांकि, पुलिस ने मुख्यालय के प्रवेश से पहले ही बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इसके बाद भारद्वाज और पुलिसकर्मियों के बीच बहस हुई। AAP नेता अपने समर्थकों को मौके पर बुलाते रहे, जबकि पुलिस की ओर से भीड़ को पीछे हटने की अपील की गई।
प्रवेश वर्मा के खिलाफ FIR की मांग
AAP की मुख्य मांग है कि साहिब सिंह की शिकायत पर प्रवेश वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और उन्हें गिरफ्तार किया जाए। पुलिस ने हालांकि प्रवेश वर्मा के खिलाफ FIR के बजाय गैर-संज्ञेय रिपोर्ट यानी NCR दर्ज की है।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई BNS की धारा 115 के तहत की गई है, जो स्वेच्छा से चोट पहुंचाने से संबंधित है। पुलिस का कहना है कि यह गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में पुलिस सामान्य तौर पर बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जांच या गिरफ्तारी नहीं कर सकती।
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद पश्चिमी दिल्ली में सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर हुए विवाद के दौरान सामने आया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में प्रवेश वर्मा एक व्यक्ति को थप्पड़ मारते हुए दिखाई देते हैं। उस व्यक्ति की पहचान साहिब सिंह के रूप में हुई है, जो AAP विधायक जरनैल सिंह से जुड़ा हुआ बताया गया है।
साहिब सिंह ने आरोप लगाया कि वह सड़क निरीक्षण के दौरान वीडियो बना रहे थे, तभी उनके साथ मारपीट हुई। दूसरी ओर, प्रवेश वर्मा ने घटना को लेकर अपना पक्ष रखते हुए आरोप लगाया कि उनके परिवार के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया था और इसी प्रतिक्रिया में विवाद हुआ। इन आरोपों की पुलिस जांच कर रही है।

दोनों पक्षों की शिकायतें
विवाद सामने आने के बाद पुलिस को केवल साहिब सिंह की ओर से ही शिकायत नहीं मिली। PWD के अधिकारियों और ठेकेदार की ओर से भी शिकायतें दी गईं। इनमें आरोप लगाया गया कि सड़क निर्माण कार्य को रोका गया और सरकारी काम में बाधा पहुंचाई गई।
इसी मामले में दिल्ली पुलिस ने AAP विधायक जरनैल सिंह के खिलाफ अलग FIR दर्ज की है। पुलिस के अनुसार यह FIR सरकारी काम में बाधा और संबंधित शिकायतों के आधार पर दर्ज की गई है।
AAP और BJP आमने-सामने
घटना के बाद AAP ने प्रवेश वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। पार्टी का कहना है कि मंत्री द्वारा किसी व्यक्ति को थप्पड़ मारने के आरोप की गंभीरता से जांच होनी चाहिए और FIR दर्ज की जानी चाहिए।
दूसरी ओर, बीजेपी ने पूरे घटनाक्रम में AAP विधायक और साहिब सिंह के व्यवहार पर भी सवाल उठाए हैं। बीजेपी नेताओं ने दावा किया है कि विवाद से पहले मौके पर उकसावे की स्थिति बनी थी। प्रवेश वर्मा ने भी अपने बचाव में परिवार के खिलाफ कथित अभद्र भाषा का हवाला दिया है।
NCR और FIR में क्या अंतर है?
इस विवाद में NCR और FIR का अंतर भी चर्चा में है। NCR किसी गैर-संज्ञेय अपराध की सूचना दर्ज करने की प्रक्रिया है। ऐसे मामले में पुलिस को जांच शुरू करने के लिए आम तौर पर मजिस्ट्रेट की अनुमति की जरूरत होती है।
वहीं FIR संज्ञेय अपराध की सूचना पर दर्ज की जाती है और इसके बाद पुलिस को कानून के तहत जांच करने की शक्ति मिलती है। इसलिए AAP जिस FIR की मांग कर रही है, वह मौजूदा NCR से अलग कानूनी प्रक्रिया होगी।
पुलिस मुख्यालय पर बढ़ा तनाव
प्रवेश वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर AAP नेताओं के पुलिस मुख्यालय पहुंचने के बाद तनाव और बढ़ गया। पुलिस द्वारा बैरिकेड लगाए जाने के कारण नेताओं और पुलिस के बीच बहस हुई।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट को लेकर सौरभ भारद्वाज, जरनैल सिंह और अन्य AAP कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
प्रवेश वर्मा से जुड़े थप्पड़ विवाद में अब मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। एक ओर साहिब सिंह की शिकायत पर प्रवेश वर्मा के खिलाफ NCR दर्ज हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर AAP FIR और गिरफ्तारी की मांग कर रही है। साथ ही AAP विधायक जरनैल सिंह से जुड़ी शिकायत पर अलग FIR दर्ज हुई है। आगे की कानूनी प्रक्रिया और पुलिस जांच से यह स्पष्ट होगा कि दोनों पक्षों की शिकायतों पर क्या कार्रवाई होती है।

