देश में Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने विपक्ष की आलोचना को ‘चुनिंदा’ बताते हुए कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं तो उन राज्यों के परिणामों पर भी सवाल उठने चाहिए, जहां विपक्षी दलों के पक्ष में नतीजे आए हैं।
चिराग पासवान ने क्या कहा?
29 सितंबर 2026 को चिराग पासवान ने SIR को लेकर विपक्ष की आलोचना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार SIR और चुनाव आयोग को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक, अगर विपक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाता है तो उसे उन राज्यों के चुनाव परिणामों पर भी सवाल उठाना चाहिए, जहां उसके पक्ष में नतीजे आए हैं।
चिराग ने इसे ‘सेलेक्टिव क्रिटिसिज्म’ बताते हुए कहा कि किसी चुनावी प्रक्रिया की आलोचना केवल राजनीतिक परिणाम के आधार पर नहीं होनी चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब SIR और चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है।
चुनाव आयोग को लेकर पहले भी दे चुके हैं बयान
चिराग पासवान इससे पहले भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी बात रख चुके हैं। सितंबर में उन्होंने कहा था कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और यदि उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं तो आयोग को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा था कि आयोग की ओर से स्पष्टीकरण विपक्ष को संतुष्ट करने के लिए नहीं, बल्कि लोगों के मन में उठ रही शंकाओं को दूर करने के लिए जरूरी है। इस रुख पर NDA के कुछ अन्य सहयोगी दलों ने भी चुनाव आयोग से SIR को लेकर स्पष्टता देने की मांग की थी।

SIR को लेकर विपक्ष की क्या आपत्ति है?
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल SIR के दौरान मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी दलों की ओर से आरोप लगाया गया है कि प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, SIR के दौरान बड़ी संख्या में नामों के हटने को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव कानूनी प्रक्रिया के तहत किए जा रहे हैं और इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित नहीं माना जाना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
SIR विवाद के बीच विपक्ष के कई दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या हटाने की मांग कर रहे हैं। यह विवाद उन रिपोर्टों के बाद और तेज हुआ जिनमें चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर मतभेदों का दावा किया गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। विपक्ष ने इन्हीं रिपोर्टों को आधार बनाकर आयोग की निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा है कि उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
कांग्रेस की CWC बैठक में SIR पर मंथन
कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक 29 सितंबर को हुई, जिसमें चुनाव आयोग, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर पार्टी की रणनीति पर चर्चा हुई। कांग्रेस पहले ही कुमार के खिलाफ कार्रवाई और SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना विरोध दर्ज करा चुकी है।
विपक्षी दलों के बीच भी इस मुद्दे पर समन्वय बढ़ाने की कोशिश हो रही है। रिपोर्टों के अनुसार INDIA गठबंधन के दल 30 सितंबर को अलग बैठक कर चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं।
बीजेपी का पलटवार
विपक्ष की आलोचना के बीच बीजेपी नेताओं ने चुनाव आयोग का बचाव किया है। बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ अभियान चलाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि कांग्रेस चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाती है।
वहीं, चिराग पासवान का ताजा बयान विपक्ष के राजनीतिक तर्क पर केंद्रित है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि चुनाव प्रक्रिया को लेकर व्यापक संदेह है, तो उन चुनाव परिणामों पर भी समान रूप से सवाल उठने चाहिए जहां विपक्षी दलों को जीत मिली। यह उनका राजनीतिक तर्क है, जबकि विपक्ष SIR की प्रक्रिया और आयोग की निर्णय प्रणाली को लेकर अलग आपत्तियां दर्ज करा रहा है।
चुनाव आयोग के सामने भी बढ़ी जवाबदेही की मांग
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण दिए हैं और कुछ मामलों में प्रक्रियात्मक बदलाव भी किए हैं। दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR से जुड़े कुछ दस्तावेज जमा करने की समयसीमा बढ़ाई गई है।
इस पूरे विवाद में अब दो प्रमुख सवाल सामने हैं—SIR के जरिए मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है और चुनाव आयोग की ओर से उठाए गए सवालों का स्पष्टीकरण जनता तथा राजनीतिक दलों के सामने किस तरह रखा जाता है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग से जुड़े घटनाक्रम इस विवाद की दिशा तय करेंगे।
SIR को लेकर राजनीतिक टकराव फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। विपक्ष चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार और NDA के नेता आयोग की प्रक्रिया का बचाव कर रहे हैं। चिराग पासवान ने विपक्ष की ‘चुनिंदा आलोचना’ पर सवाल उठाया है। अब इस विवाद में चुनाव आयोग की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और न्यायिक कार्यवाही पर नजर रहेगी।

