उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू होते ही सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। पहले दिन बीजेपी की ओर से आठ और समाजवादी पार्टी की ओर से तीन नामांकन पत्र खरीदे गए। हालांकि, अभी तक दोनों दलों ने अपने सभी प्रत्याशियों के नामों की औपचारिक घोषणा नहीं की है। 16 अक्टूबर को मतदान होना है और इसी के साथ विधानसभा के नंबर गेम पर भी नजरें टिक गई हैं।
10 सीटों के लिए शुरू हुई नामांकन प्रक्रिया
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 29 सितंबर को पहले दिन कुल 11 नामांकन पत्र खरीदे गए, जिनमें बीजेपी के आठ और सपा के तीन पर्चे शामिल हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि पर्चा खरीदना और उम्मीदवार का आधिकारिक नामांकन दाखिल करना अलग-अलग प्रक्रिया है। उम्मीदवारों के नाम और अंतिम तस्वीर नामांकन दाखिल होने के बाद ही ज्यादा स्पष्ट होगी।
नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। यदि जरूरी हुआ तो 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी।
बीजेपी के आठ पर्चों से क्या संकेत?
बीजेपी की ओर से आठ नामांकन पत्र खरीदे जाने के बाद संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। मीडिया रिपोर्टों में स्मृति ईरानी, हरदीप सिंह पुरी, बृजलाल, राजवीर सिंह समेत कई नामों का उल्लेख हुआ है। बीजेपी ने संभावित नामों का पैनल तैयार किया है, लेकिन अंतिम उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची अभी सामने नहीं आई है।
मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर बीजेपी के पास 256 विधायक हैं। सहयोगी दलों और समर्थक विधायकों को जोड़ने पर बीजेपी नेतृत्व वाले खेमे की संख्या अलग-अलग रिपोर्टों में करीब 289 से 294 के बीच बताई गई है। यही संख्या राज्यसभा चुनाव के गणित में अहम भूमिका निभाएगी।

सपा ने तीन पर्चे क्यों खरीदे?
समाजवादी पार्टी ने तीन नामांकन पत्र खरीदे हैं। पार्टी की ओर से पहले ही तीन उम्मीदवार उतारने की तैयारी की खबरें सामने आती रही हैं। प्रो. रामगोपाल यादव और पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं, जबकि तीसरे उम्मीदवार को लेकर अलग-अलग नाम सामने आ रहे हैं।
सपा के पास विधानसभा में 101 विधायक हैं। कांग्रेस के दो विधायक हैं। दोनों दलों को मिलाकर 103 का आंकड़ा बनता है। उपलब्ध संख्या के आधार पर सपा के लिए दो सीटों का गणित अपेक्षाकृत स्पष्ट है, जबकि तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त वोट जुटाने की जरूरत पड़ेगी।
37 वोट का है पूरा नंबर गेम
यूपी विधानसभा की कुल स्वीकृत संख्या 403 है, लेकिन छह सीटें खाली होने के कारण फिलहाल प्रभावी संख्या 397 विधायक है। इस गणित के आधार पर एक राज्यसभा सीट के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत होगी। यानी दो सीटों के लिए 74 वोट और तीन सीटों के लिए 111 प्रथम वरीयता वोट चाहिए होंगे।
इसी वजह से 10वीं सीट के लिए अतिरिक्त वोट और दूसरी वरीयता के वोट महत्वपूर्ण हो सकते हैं। चुनाव में विधायक एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote) के जरिए मतदान करते हैं।
क्रॉस वोटिंग के दावों से बढ़ी सियासी हलचल
राज्यसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं ने बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के विधायकों के क्रॉस वोटिंग करने का दावा किया है। सपा विधायक अतुल प्रधान ने बीजेपी के भीतर नाराजगी और कुछ विधायकों के संपर्क में होने की बात कही है। वहीं सपा विधायक आरके वर्मा ने दावा किया कि बीजेपी के करीब 12 विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं।
इन दावों की फिलहाल स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। चुनाव में कौन विधायक किसे वोट देता है, यह मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए सपा नेताओं की ओर से बताए जा रहे संभावित आंकड़ों और संपर्क में होने के दावों को अभी राजनीतिक दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
16 अक्टूबर को होगा फैसला
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान निर्धारित है। बीजेपी और सपा दोनों ने नामांकन पत्र खरीदकर चुनावी तैयारी का संकेत दिया है, लेकिन अंतिम उम्मीदवारों की सूची, नाम वापसी और मतदान के बाद ही पूरा समीकरण सामने आएगा।
इस चुनाव में 397 विधायकों की मौजूदा संख्या और 37 वोट का कोटा सबसे महत्वपूर्ण गणित है। इसके साथ उम्मीदवारों की संख्या, सहयोगी दलों का रुख, दूसरी वरीयता के वोट और यदि कोई क्रॉस वोटिंग होती है तो उसका असर भी परिणाम पर पड़ सकता है।
यूपी का राज्यसभा चुनाव इस बार केवल नामांकन तक सीमित नहीं रहने वाला है। 10 सीटों के लिए 11 पर्चे खरीदे जाने से मुकाबले की तस्वीर जरूर दिलचस्प हुई है, लेकिन अंतिम स्थिति नामांकन और नाम वापसी के बाद स्पष्ट होगी। फिलहाल बीजेपी के आठ पर्चे और सपा के तीन पर्चे, 37 वोट का कोटा और क्रॉस वोटिंग के राजनीतिक दावे चुनावी चर्चा के केंद्र में हैं।

