सोनीपत में सड़क निर्माण में कथित तौर पर घटिया सामग्री के इस्तेमाल को लेकर ग्रामीणों ने अनोखे तरीके से विरोध जताया। बड़वासनी गांव से ट्रिपल आईटी तक बनी सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए ग्रामीण लोक निर्माण विभाग के कार्यालय पहुंचे। अधिकारी नहीं मिले तो लोगों ने खाली कुर्सी पर सड़क में इस्तेमाल सामग्री रखकर उसकी आरती उतारी और कार्रवाई की मांग की।
सड़क की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
मामला सोनीपत के गांव बड़वासनी से ट्रिपल आईटी तक बनी सड़क से जुड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में मानकों के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया गया। उनका दावा है कि सड़क में मिट्टी का इस्तेमाल किया गया, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर पहले भी संबंधित अधिकारियों और उच्च अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग के कार्यालय पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराने का फैसला किया।
अधिकारी नहीं मिले तो खाली कुर्सी की उतारी आरती
ग्रामीण जब लोक निर्माण विभाग के कार्यालय पहुंचे तो उनके मुताबिक वहां संबंधित अधिकारी मौजूद नहीं थे। इसके बाद लोगों ने सीनियर इंजीनियर के कार्यालय के बाहर धरना दिया और नारेबाजी की।
विरोध दर्ज कराने के लिए ग्रामीणों ने खाली कुर्सी पर सड़क निर्माण में इस्तेमाल की गई कथित घटिया सामग्री रखी। इसके बाद उन्होंने कुर्सी की आरती उतारकर अपना विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों पर सवाल उठाए और निर्माण कार्य की जांच कराने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना था कि खाली कुर्सी के जरिए वे यह संदेश देना चाहते हैं कि शिकायत लेकर पहुंचने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं हैं।

लाखों रुपये के गबन का लगाया आरोप
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में सरकारी धन के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि निर्माण में मिट्टी सहित कथित तौर पर घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर लाखों रुपये के गबन की आशंका है।
हालांकि, ये ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या विभागीय जांच के निष्कर्ष फिलहाल सामने नहीं आए हैं। सड़क की गुणवत्ता और निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की वास्तविक स्थिति तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने सड़क की गुणवत्ता को लेकर पहले ही अधिकारियों को शिकायत दी थी। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद सड़क निर्माण से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।
इसी वजह से ग्रामीणों ने दोबारा विभागीय कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने की कोशिश की। लेकिन अधिकारी नहीं मिलने पर उनका गुस्सा और बढ़ गया और उन्होंने विरोध का यह अनोखा तरीका अपनाया।
ताला लगाने की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच नहीं कराई गई और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वे लोक निर्माण विभाग के कार्यालय पर ताला लगाने का कदम उठा सकते हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि सड़क निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए, निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की जांच हो और यदि मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
अब जांच और विभागीय कार्रवाई पर नजर
सड़क निर्माण को लेकर उठे सवालों के बाद अब मामला विभागीय जांच की ओर बढ़ सकता है। यदि तकनीकी जांच में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता निर्धारित मानकों से कम पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी या ठेकेदार के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल ग्रामीणों के प्रदर्शन ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और शिकायतों के निस्तारण को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि लोक निर्माण विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और सड़क की गुणवत्ता की जांच कब कराई जाती है।
सोनीपत में सड़क निर्माण के खिलाफ ग्रामीणों का यह अनोखा प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया है। खाली कुर्सी पर सड़क निर्माण सामग्री रखकर आरती उतारने के जरिए ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों तक अपनी नाराजगी पहुंचाने की कोशिश की। अब ग्रामीणों की मांग और आरोपों पर विभाग की जांच तथा कार्रवाई से ही स्थिति स्पष्ट होगी।

