बहुजन समाज पार्टी यानी BSP ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अपने संगठन को नए तरीके से व्यवस्थित किया है। पार्टी प्रमुख मायावती ने संगठन को तीन सेक्टरों में बांटकर अलग-अलग नेताओं को राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की निगरानी मायावती ने अपने पास रखी है, जबकि अन्य राज्यों के लिए अलग-अलग प्रभारी तय किए गए हैं।
तीन सेक्टरों में बांटा गया BSP का संगठन
मायावती ने पार्टी संगठन को तीन सेक्टरों में बांटने की जानकारी दी है। इसके तहत अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दी गई है।
सेक्टर-1 में 10 राज्यों को रखा गया है। इसकी जिम्मेदारी राज्यसभा सांसद रामजी गौतम और सुरेश राव को दी गई है।
सेक्टर-2 में 9 राज्यों को शामिल किया गया है। इसकी कमान पूर्व राज्यसभा सांसद राजाराम और अतरसिंह राव को सौंपी गई है।
वहीं सेक्टर-3 में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को रखा गया है। इन दोनों राज्यों की निगरानी मायावती स्वयं करेंगी। लखनऊ स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
हालिया रिपोर्टों में भी सेक्टर-1 के लिए रामजी गौतम और सेक्टर-2 के लिए राजाराम की जिम्मेदारी का उल्लेख किया गया है।
यूपी और उत्तराखंड की जिम्मेदारी मायावती के पास
BSP के लिए उत्तर प्रदेश सबसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक क्षेत्रों में से एक है। 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में मायावती ने यूपी और उत्तराखंड को सीधे अपने नियंत्रण में रखा है।
हाल की रिपोर्टों के अनुसार, मायावती पार्टी संगठन में लगातार बदलाव कर रही हैं और चुनावों से पहले राज्य स्तर पर तैयारियों की समीक्षा कर रही हैं।
उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड को भी इसी सेक्टर में रखने का मतलब है कि इन दोनों राज्यों के संगठनात्मक कामकाज की निगरानी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के स्तर से होगी।
भारी बारिश और तूफान से प्रभावित राज्यों में मदद की अपील
मायावती ने संगठनात्मक बदलाव के साथ देश के कई हिस्सों में भारी बारिश, आंधी और तूफान से प्रभावित लोगों का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने राज्य सरकारों से प्रभावित लोगों को राहत और मदद उपलब्ध कराने की मांग की। महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति का जिक्र करते हुए भी उन्होंने प्रभावित किसानों और लोगों को तत्काल सहायता दिए जाने की बात कही।
उन्होंने पार्टी के सेक्टर प्रभारियों से अपील की कि जिन राज्यों में प्राकृतिक आपदा से नुकसान हुआ है, वहां BSP कार्यकर्ता अपनी क्षमता के अनुसार लोगों की मदद करें।
मदद के नाम पर अलग से पैसा नहीं जुटाने के निर्देश
मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं को राहत कार्यों में शामिल होने की अपील के साथ एक महत्वपूर्ण निर्देश भी दिया है। उनके मुताबिक, आपदा प्रभावित लोगों की मदद के लिए अलग से धन एकत्र नहीं किया जाना चाहिए।
इसका उद्देश्य राहत के नाम पर किसी तरह की गलत गतिविधि या आर्थिक दुरुपयोग की संभावना को रोकना बताया गया है।
सेक्टर-1 और सेक्टर-2 के प्रभारियों से उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में पार्टी कार्यकर्ताओं की मदद सुनिश्चित करने को कहा है।
ईशान आनंद को भी मिली संगठनात्मक जिम्मेदारी
BSP के संगठनात्मक बदलावों के बीच ईशान आनंद का नाम भी महत्वपूर्ण रहा है। हाल ही में मायावती ने उन्हें पार्टी में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी दी थी। 23 सितंबर को BSP की राष्ट्रीय बैठक में ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने की जानकारी सामने आई।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब मायावती ने इससे पहले अपने दोनों भतीजों को पार्टी पदों से दूर रखने की बात कही थी। बाद में ईशान आनंद को संगठन में जिम्मेदारी देने का फैसला सामने आया।
हालिया संगठनात्मक बदलावों को BSP की आगामी चुनावी तैयारियों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

आगामी चुनावों से पहले संगठन पर जोर
BSP के संगठन में ये बदलाव ऐसे समय हुए हैं जब उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। पार्टी के लिए बूथ और राज्य स्तर के संगठन को सक्रिय रखना अहम होगा।
हाल की रिपोर्टों के अनुसार, मायावती ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ संगठनात्मक मामलों की समीक्षा तेज की है। पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण का सिलसिला भी जारी है।
रामजी गौतम लंबे समय से BSP के राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं और कई राज्यों के प्रभारी रह चुके हैं।
विधानसभा चुनावों से पहले BSP ने संगठन को तीन सेक्टरों में बांटकर राज्यों की जिम्मेदारियों का नया ढांचा तैयार किया है। सेक्टर-1 और सेक्टर-2 की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेताओं को दी गई है, जबकि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की निगरानी मायावती ने अपने पास रखी है। इसके साथ ही पार्टी ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं को मदद करने का निर्देश दिया है। संगठनात्मक बदलावों और नई जिम्मेदारियों के जरिए BSP आगामी चुनावों के लिए अपने संगठन को सक्रिय करने पर जोर देती दिखाई दे रही है।

