दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खरीद में कथित अनियमितताओं से जुड़े करीब 700 करोड़ रुपये के मामले में एंटी करप्शन ब्रांच ने मुख्य आरोपी राजीव कुमार उर्फ राजीव अरोड़ा उर्फ राजीव रंगीला को गिरफ्तार किया है। आरोपी को अमेरिका से लौटते ही 24 सितंबर को एयरपोर्ट से पकड़ा गया था। इसके बाद राउज एवेन्यू कोर्ट ने उसे 29 सितंबर तक ACB की हिरासत में भेज दिया है।
सरकारी अस्पतालों की खरीद पर उठे सवाल
यह मामला दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के लिए मेडिकल उपकरण और अन्य जरूरी सामान खरीदने में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है। स्वास्थ्य विभाग की विजिलेंस टीम के डिप्टी डायरेक्टर की शिकायत के बाद मामले की जांच आगे बढ़ी।
शिकायत में CR रेडियोग्राफी सिस्टम, एनेस्थीसिया मशीन, एक्स-रे मशीन और अन्य मेडिकल उपकरणों की खरीद प्रक्रिया में नियमों के कथित उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि खरीद प्रक्रिया में किन स्तरों पर अनियमितताएं हुईं।
दो मशीनों के टेंडर से 448 मशीनों तक कैसे पहुंचा मामला?
मामले में सबसे महत्वपूर्ण आरोप पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की खरीद से जुड़ा है। ACB के अनुसार, जिस प्रक्रिया में कथित तौर पर सिर्फ दो पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की खरीद का टेंडर था, उसमें 448 मशीनों की सप्लाई का ऑर्डर दिए जाने की बात सामने आई है।
जांच एजेंसी इस पूरे खरीद नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। इसमें टेंडर की प्रक्रिया, संबंधित कंपनियों, अधिकारियों की भूमिका और सप्लाई से जुड़े दस्तावेजों की जांच शामिल है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
ACB ने क्यों मांगी आरोपी की कस्टडी?
राउज एवेन्यू कोर्ट में ACB की ओर से पेश वरिष्ठ सरकारी वकील कुमार संजय ने आरोपी की पुलिस हिरासत की मांग करते हुए कहा कि वह पहले जांच से दूर था। एजेंसी के मुताबिक, आरोपी को पकड़ने के लिए लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। इसके बाद गैर-जमानती वारंट और भगोड़ा घोषित करने की कार्रवाई भी की गई।
ACB का कहना है कि आरोपी से पूछताछ इसलिए जरूरी है ताकि कथित घोटाले में शामिल अन्य सरकारी अधिकारियों और निजी कंपनियों की भूमिका स्पष्ट हो सके। एजेंसी कथित धन के लेन-देन और मनी ट्रेल की भी जांच करना चाहती है।
इसके अलावा जांचकर्ताओं को उन टेंडर फाइलों और दूसरे दस्तावेजों की तलाश है, जिनके गायब होने की बात जांच में सामने आई है। एजेंसी यह पता लगाना चाहती है कि ये दस्तावेज कहां हैं और खरीद प्रक्रिया से उनका क्या संबंध है।
आरोपी के वकील ने रिमांड का किया विरोध
आरोपी की ओर से अधिवक्ता विक्रम सिंह पंवार ने पुलिस रिमांड का विरोध किया। उन्होंने अदालत में दलील दी कि मामले की जांच पहले ही काफी आगे बढ़ चुकी है और तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।
बचाव पक्ष के मुताबिक, जांच एजेंसी के पास पहले से ही आवश्यक दस्तावेज और सबूत मौजूद हैं। ऐसे में आरोपी को चार दिन की पुलिस हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है।
यह पक्ष अदालत के सामने बचाव की दलील के रूप में रखा गया है। मामले में आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगा।
कोर्ट ने 29 सितंबर तक दी हिरासत
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पेशल जज विद्या प्रकाश ने आरोपी को 29 सितंबर तक ACB की हिरासत में भेज दिया। अदालत ने माना कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर हैं और जांच एजेंसी की ओर से हिरासत मांगने के लिए बताए गए कारणों पर पूछताछ की जरूरत है।
अब ACB की पूछताछ में कथित खरीद अनियमितताओं की पूरी प्रक्रिया, संबंधित अधिकारियों और कंपनियों की भूमिका तथा पैसों के लेन-देन से जुड़े सवालों पर जांच आगे बढ़ने की उम्मीद है।
जांच के अगले चरण पर नजर
करीब 700 करोड़ रुपये की कथित खरीद अनियमितताओं का यह मामला कई स्तरों पर जांच का विषय बना हुआ है। मेडिकल उपकरणों की खरीद से लेकर टेंडर प्रक्रिया और भुगतान तक की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
राजीव कुमार से पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी किन नए तथ्यों तक पहुंचती है, यह आगे की कार्रवाई में महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल अदालत ने उन्हें 29 सितंबर तक ACB की हिरासत में भेजा है और मामले की जांच जारी है।

