बिहार में छात्र आंदोलन को लेकर सियासत लगातार तेज होती जा रही है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने एक बार फिर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर निशाना साधा है। उन्होंने छात्र आंदोलन के दौरान कथित पुलिस फायरिंग और लाठीचार्ज को गंभीर बताते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) से मुलाकात की और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
DGP से मिलकर सौंपा ज्ञापन
तेजस्वी यादव ने बताया कि उन्होंने पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन सौंपकर संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने और सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कठोर कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है।
सोशल मीडिया पर लगाए गंभीर आरोप
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए अपने बयान में तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया। उन्होंने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के विरुद्ध बताया और कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

पांच प्रमुख सवालों के जरिए सरकार को घेरा
अपने ज्ञापन में तेजस्वी यादव ने पुलिस कार्रवाई पर कई सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि भीड़ नियंत्रण के दौरान निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान का पालन क्यों नहीं किया गया। साथ ही उन्होंने फायरिंग के आदेश देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग भी की।
कानून-व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
राजद नेता ने आरोप लगाया कि बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं और सरकार को ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।
विपक्ष ने दी आंदोलन की चेतावनी
तेजस्वी यादव ने कहा कि यदि छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो विपक्ष इस मुद्दे को लेकर व्यापक आंदोलन करेगा। उनके अनुसार, छात्रों की आवाज को दबाने का कोई भी प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
मामला बना राजनीतिक बहस का केंद्र
छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर बिहार में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एक ओर विपक्ष सरकार से जवाबदेही और जांच की मांग कर रहा है, वहीं सरकार और प्रशासन की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर भी सभी की नजरें टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

