राजधानी दिल्ली में विदेशी पार्सल, अमेरिकी डॉलर और सोने का लालच देकर लोगों से लाखों रुपये ठगने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक नाइजीरियाई महिला सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह फर्जी कस्टम क्लीयरेंस और इमीग्रेशन प्रक्रिया के नाम पर लोगों से पैसे वसूलता था।
कैसे शुरू हुई ठगी की कहानी?
पुलिस के अनुसार, 31 मार्च को दिल्ली के एक निवासी ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि कुछ लोगों ने खुद को अमेरिका का निवासी बताकर उससे संपर्क किया। पहले बातचीत और ऑनलाइन चैट के जरिए उसका विश्वास जीता गया, फिर दावा किया गया कि उसके नाम से अमेरिकी डॉलर और सोने से भरा एक पार्सल भेजा गया है।
इसके बाद मनी डिक्लेरेशन सर्टिफिकेट, फ्लाइट टिकट, कस्टम क्लीयरेंस और पार्सल रिलीज कराने जैसे बहाने बनाकर पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों और UPI आईडी के माध्यम से 1.46 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।
तकनीकी जांच से खुला पूरा नेटवर्क
शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने डिजिटल ट्रांजैक्शन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की। सबसे पहले दिल्ली से दीपक कुमार (22) को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद तेलंगाना के जयशंकर भूपालपल्ली जिले में छापेमारी कर कोंडा सागर (33) और अजमीरा विनोद कुमार (30) को पकड़ा गया।

जांच आगे बढ़ने पर मुख्य भूमिका निभाने वाली नाइजीरियाई महिला साइमन मिरेकल चिनोंसो (22) का नाम सामने आया, जिसे विशाखापत्तनम से गिरफ्तार किया गया।
ऐसे काम करता था साइबर ठगी का गिरोह
पुलिस पूछताछ में पता चला कि तीन भारतीय आरोपी कमीशन के बदले साइबर ठगों को ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ उपलब्ध कराते थे। इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे अलग-अलग खातों में भेजकर छिपाने के लिए किया जाता था।
वहीं, नाइजीरियाई महिला खुद को इमीग्रेशन अधिकारी, कस्टम अफसर या किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था की प्रतिनिधि बताकर अंग्रेजी में पीड़ितों से बातचीत करती थी। वह लोगों को कानूनी कार्रवाई या पार्सल जब्त होने का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करती थी।
पुलिस की जांच जारी
दिल्ली पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह सिंडिकेट कई राज्यों में सक्रिय हो सकता है और विदेशी नागरिकों के नेटवर्क का भी इस्तेमाल कर रहा था।
ऐसी ठगी से कैसे बचें?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति विदेशी पार्सल, लॉटरी, डॉलर, सोना या कस्टम क्लीयरेंस के नाम पर पैसे मांगता है, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते या UPI के माध्यम से पैसा ट्रांसफर न करें। संदेह होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं।

