नगीना से सांसद और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक के आरक्षण संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरक्षण, जातीय जनगणना और मंडल आयोग के मुद्दों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर सवाल उठाए। साथ ही समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा पहले लगाए गए एक आरोप का भी उल्लेख किया।
जातीय जनगणना पर उठाए सवाल
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि जातीय जनगणना आखिर कब कराई जाएगी। उनका कहना था कि सामाजिक न्याय और समान अवसर की बात तभी सार्थक होगी, जब वास्तविक आंकड़ों के आधार पर नीतियां बनाई जाएंगी।
उन्होंने कहा कि आरक्षण और सामाजिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर स्पष्ट नीति अपनाने की जरूरत है।
अखिलेश यादव के पुराने आरोप का किया जिक्र
अपने बयान में चंद्रशेखर आजाद ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के उस पुराने आरोप का भी उल्लेख किया, जिसमें दावा किया जाता रहा है कि 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री आवास को गंगाजल से धुलवाया गया था। आजाद ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि ऐसा हुआ था, तो उसके पीछे क्या कारण थे।

यह आरोप पूर्व में भी राजनीतिक बहस का विषय रहा है। हालांकि, इस दावे को लेकर अलग-अलग राजनीतिक पक्षों की अलग-अलग राय रही है।
‘मंडल के जवाब में कमंडल की राजनीति हुई’
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि 1990 में मंडल आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद देश में कमंडल की राजनीति शुरू हुई। उनका आरोप था कि जब समाज के वंचित वर्गों ने अपने अधिकारों की मांग उठाई, तब धार्मिक मुद्दों को प्रमुखता देकर सामाजिक न्याय के सवालों को पीछे धकेल दिया गया।
मंडल आयोग और EWS आरक्षण पर भी बोले
उन्होंने दावा किया कि मंडल आयोग की सिफारिशों का पूर्ण रूप से क्रियान्वयन अब तक नहीं हुआ है। उनका कहना था कि सरकार को आयोग की सभी सिफारिशें लागू करनी चाहिए।
चंद्रशेखर आजाद ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण का भी उल्लेख करते हुए कहा कि जो लोग आरक्षण की आलोचना करते हैं, वे स्वयं आरक्षण का लाभ क्यों लेते हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर स्पष्टता और समान दृष्टिकोण अपनाने की मांग की।
राजनीतिक बहस फिर हुई तेज
आरक्षण, जातीय जनगणना और सामाजिक न्याय के मुद्दे आगामी चुनावी राजनीति में भी अहम बने हुए हैं। चंद्रशेखर आजाद के इस बयान के बाद इन विषयों पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। अब यह देखना होगा कि सरकार और अन्य राजनीतिक दल इन सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

