सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार बताते हुए कहा है कि इसे किसी भी स्थिति में नकारा नहीं जा सकता। अदालत ने संकेत दिया कि वह देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए एक समान प्रोटोकॉल और दिशा-निर्देश तैयार करने की संभावना पर विचार करेगी। यह टिप्पणी NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के विरोध के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की गई।
पूरे देश के लिए एक समान व्यवस्था पर विचार
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि यह ऐसा मुद्दा है, जिस पर पूरे देश के स्तर पर एक समान दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध के लिए निर्धारित स्थान और स्पष्ट प्रक्रिया होनी चाहिए, जबकि असामाजिक तत्वों से निपटने के लिए प्रशासन को आवश्यक अधिकार भी मिलने चाहिए।
शांतिपूर्ण विरोध संविधान का अधिकार
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार संविधान द्वारा पूरी तरह संरक्षित है और इसे नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि केवल विरोध प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस की कथित ज्यादतियों को उचित नहीं ठहराया जा सकता। यह अदालत की मौखिक टिप्पणी है।

पुलिस पर हमलों को लेकर भी जताई चिंता
सुनवाई के दौरान एक अन्य याचिका का भी उल्लेख किया गया, जिसमें प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों पर कथित हमलों का आरोप लगाया गया था। इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि पुलिसकर्मियों का घायल होना भी गंभीर चिंता का विषय है और यदि सुरक्षा व्यवस्था में कमी रही है तो राज्य से जवाब मांगा जा सकता है। यह अदालत की मौखिक टिप्पणी है।
प्रोटोकॉल में विरोध और सुरक्षा दोनों पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना चाहता है, तो उसके लिए उचित स्थान और स्पष्ट प्रोटोकॉल होना चाहिए। साथ ही यदि कोई असामाजिक तत्व कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करता है तो प्रशासन उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। अदालत ने कहा कि पूरे देश में इस विषय पर एकरूपता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
अगली सुनवाई मंगलवार को
यह मामला उन याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के विरोध के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को निर्धारित की है।

