हरिद्वार में आगामी कुंभ आयोजन से पहले उदासीन नया अखाड़े के भीतर चल रहा विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के दूसरे गुट की बैठक में ‘असली और नकली देवता’ को लेकर बड़ा विवाद सामने आया। परिषद के अध्यक्ष डॉ. रवींद्र पुरी महाराज ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए पंजाब सरकार से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
बैठक में उठा ‘असली-नकली देवता’ का मुद्दा
हाल ही में आयोजित अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के दूसरे गुट की बैठक में पंजाब से आए उदासीन नया अखाड़े के साधु-संतों और प्रबंध समिति के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान परिषद अध्यक्ष डॉ. रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि अब विवाद केवल फर्जी दस्तावेजों या व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि असली और नकली देवताओं को लेकर भी मतभेद सामने आ गए हैं।
पंजाब से आए संतों ने किया बड़ा दावा
बैठक में मौजूद पंजाब से आए संतों ने दावा किया कि असली देवता उनके पास हैं, जबकि हरिद्वार स्थित दूसरे गुट द्वारा कथित तौर पर नकली देवताओं का स्नान कराया जा रहा है। इस दावे के बाद संत समाज में विवाद और गहरा गया है तथा धार्मिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

पंजाब सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग
अखाड़ा परिषद का कहना है कि इस विवाद के कारण संत समाज में गुटबाजी बढ़ रही है। परिषद अध्यक्ष डॉ. रवींद्र पुरी महाराज ने पंजाब सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि असली देवता किसके पास हैं और नकली देवताओं को लेकर फैलाए जा रहे दावों की सच्चाई क्या है।
विपक्षी गुट को दी खुली चुनौती
बैठक में संतों ने विपक्षी गुट को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे अपने दावों पर अडिग हैं तो अमृतसर स्थित श्री हरिमंदिर साहिब जाकर शपथ लें कि असली और नकली देवता किसके पास हैं। संतों ने यह भी कहा कि अखाड़े की परंपरा के अनुसार पंच परमेश्वर का निर्णय सर्वोपरि होता है और बिना उचित जांच के अलग परिषद का गठन करना परंपराओं के विरुद्ध है।
कुंभ से पहले बढ़ा धार्मिक विवाद
हरिद्वार में कुंभ आयोजन की तैयारियों के बीच सामने आया यह विवाद धार्मिक संगठनों और संत समाज के लिए नई चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद इस विवाद का समाधान किस प्रकार निकाला जाता है और अखाड़ों के बीच बढ़ते मतभेद कैसे सुलझाए जाते हैं।

