भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक बुधवार से शुरू होने जा रही है। यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब केंद्र सरकार विकास को प्राथमिकता देने वाला बजट पेश कर चुकी है। महंगाई दर फिलहाल नियंत्रण में है और भारत अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित ट्रेड डील को लेकर भी उम्मीदें बनी हुई हैं। इन तमाम कारकों के बीच आरबीआइ की यह बैठक बाजार सरकार और आम लोगों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। निवेशक और उद्योग जगत की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय बैंक आगे की ब्याज दर नीति को लेकर क्या संकेत देता है।
शुक्रवार को आएगा फैसला और रेपो रेट पर नजर
आरबीआइ गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुआई वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति अपना फैसला शुक्रवार को घोषित करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार पिछले फरवरी से अब तक आरबीआइ रेपो रेट में कुल 125 आधार अंकों की कटौती कर चुका है। इसके चलते अर्थव्यवस्था को पर्याप्त समर्थन मिल चुका है। फिलहाल न तो महंगाई कोई बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है और न ही वृद्धि को लेकर गंभीर चिंता दिख रही है। ऐसे में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार आरबीआइ ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और रेपो रेट को स्थिर रख सकता है।

नकदी स्थिति और सीआरआर पर हो सकता है मंथन
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का मानना है कि इस समय रेपो रेट में और कटौती की संभावना लगभग नहीं के बराबर है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग सिस्टम में नकदी की तंगी बनी हुई है और ऐसे माहौल में सभी बैंकों के लिए दरों में कटौती करना व्यवहारिक नहीं होगा। इसी वजह से मौद्रिक नीति समिति के ठहराव का रास्ता अपनाने की ज्यादा संभावना है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आरबीआइ नकदी बढ़ाने के लिए वैकल्पिक उपायों पर विचार कर सकता है। जरूरत पड़ने पर नकद आरक्षित अनुपात यानी सीआरआर में कटौती का विकल्प भी खुला रखा जा सकता है।
महंगाई और जीडीपी आंकड़े बनेंगे आगे की नीति का आधार
रेटिंग एजेंसी इक्रा का भी मानना है कि फिलहाल रेपो रेट में ठहराव जरूरी है। एजेंसी के अनुसार जनवरी 2026 के खुदरा मुद्रास्फीति आंकड़े और वित्त वर्ष 2024 से 2026 तक के जीडीपी आंकड़ों का समग्र आकलन यही संकेत देता है कि अभी ब्याज दरों में बदलाव से बचना बेहतर होगा। जनवरी 2026 की खुदरा महंगाई के आंकड़े 12 फरवरी को जारी किए जाएंगे जिसमें 2024 को नया आधार वर्ष माना जाएगा। वहीं जीडीपी के आंकड़े 27 फरवरी को सामने आएंगे जिनमें 2022 से 23 को आधार वर्ष रखा जाएगा। इन आंकड़ों के बाद आरबीआइ की आगे की रणनीति और स्पष्ट हो सकती है।

