बिहार में मेडिकल एडमिशन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच के दौरान आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU के सामने एक ऐसी कहानी आई है, जिसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट पर आरोप है कि कभी वह दूसरों की जगह परीक्षा देने वाला सॉल्वर था, लेकिन बाद में उसने कथित तौर पर मेडिकल एडमिशन का पूरा नेटवर्क खड़ा कर लिया।
सॉल्वर से शुरू हुआ सफर
पटना के मकसूदपुर का रहने वाला रविशंकर कम उम्र में ही कथित परीक्षा फर्जीवाड़े के नेटवर्क से जुड़ गया था। जांच एजेंसी के अनुसार, वह दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा में बैठकर सॉल्वर की भूमिका निभाता था।
साल 2022 में राजस्थान के धौलपुर जिले में रेलवे ग्रुप-डी परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े के मामले में निहालगंज थाना पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद वह जेल चला गया।
जेल में रहते पास किया NEET-UG
रविशंकर की कहानी का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा यह है कि जेल में रहने के दौरान ही उसने NEET-UG परीक्षा पास की। बाद में जमानत पर बाहर आने के बाद उसने पावापुरी स्थित भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान में MBBS में दाखिला लिया।
मेडिकल कॉलेज में दाखिले के बाद परीक्षा प्रक्रिया और मेडिकल एडमिशन से जुड़ी उसकी जानकारी और बढ़ती गई। आरोप है कि इसके बाद उसने खुद का नेटवर्क तैयार करना शुरू किया।

सॉल्वर से बना कथित एडमिशन नेटवर्क
EOU के मुताबिक, कथित नेटवर्क में NEET में सॉल्वर बैठाने से लेकर बायोमेट्रिक और फोटो सत्यापन में हेरफेर, फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने और मेडिकल कॉलेजों में रजिस्ट्रेशन व एडमिशन तक की व्यवस्था शामिल थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस काम के लिए अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूले जाते थे। कथित तौर पर रकम 12 लाख से लेकर 30 लाख रुपये तक होती थी।
छापेमारी में मिले कई दस्तावेज
रविशंकर की गिरफ्तारी के बाद EOU ने उसके कथित ठिकानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी के मुताबिक, वहां से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, मूल दस्तावेज, ट्रांसफर सर्टिफिकेट, खाली परीक्षा बुकलेट और बैंक पासबुक बरामद हुईं।
इसके अलावा डिजिटल डिवाइस, नकदी, भरे हुए चेक और हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक भी मिलने का दावा किया गया। जांच के दौरान फर्जी जाति, आय और दिव्यांगता प्रमाणपत्र भी सामने आए।
मेडिकल छात्रों तक फैला नेटवर्क
EOU का दावा है कि इस कथित नेटवर्क में मेडिकल, नर्सिंग और डेंटल कॉलेजों के छात्र भी शामिल थे। जांच में करीब आधा दर्जन मेडिकल कॉलेजों के MBBS छात्रों और डॉक्टरों की पहचान किए जाने की बात सामने आई है।
एजेंसी ने NEET-UG में 17 ऐसे अभ्यर्थियों को भी चिह्नित किया है, जिनकी जगह कथित तौर पर सॉल्वर बैठाए जाने की आशंका है।
दिव्यांग कोटे में भी कथित फर्जीवाड़ा
जांच एजेंसी के अनुसार, रविशंकर के नेटवर्क ने ऐसे अभ्यर्थियों को भी दिव्यांग कोटे का लाभ दिलाने की कोशिश की, जो कथित तौर पर इसके पात्र नहीं थे।
आरोप है कि निर्धारित पात्रता पूरी दिखाने के लिए फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र तैयार कराए जाते थे। EOU अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों, दस्तावेजों और पैसों के लेन-देन की कड़ियों की जांच कर रही है।

