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Wednesday, September 2, 2026
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दिल्ली में बाढ़ और जलभराव रोकने की तैयारी, सामने आई 8 नालों की गंभीर समस्या

दिल्ली में बारिश शुरू होते ही जलभराव का डर फिर बढ़ जाता है। इस बार प्रशासन ने समस्या की जड़ तक पहुंचने की कोशिश की है। आठ ऐसे नालों की पहचान हुई है, जहां कचरा, अतिक्रमण, सीवर और गाद ने पानी की निकासी को गंभीर चुनौती बना दिया है।

आठ नाले, आठ अलग चुनौतियां

दिल्ली में बाढ़ और जलभराव से निपटने की तैयारी के बीच सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की सर्विस प्लान रिपोर्ट में आठ ‘मुश्किल’ नालों को चिन्हित किया गया है। इनमें एस्केप ड्रेन नंबर-1, बिहारीपुर, बुंद, किराड़ी सुलेमान नगर, पंखा रोड, रिलीफ, नसीरपुर और असोला ड्रेन शामिल हैं। इनकी परेशानी सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके आसपास की पूरी व्यवस्था से जुड़ी है।

जहां मशीन पहुंचना भी मुश्किल

बिहारीपुर और बुंद ड्रेन घनी आबादी के बीच से गुजरते हैं। आसपास बने घरों के कारण सफाई मशीनों को अंदर ले जाना आसान नहीं है। ऊपर से कचरा और गोबर नालों में पहुंचने से स्थिति और बिगड़ती है। समाधान के लिए समानांतर सड़क, अतिक्रमण हटाने और ड्रेन को दोबारा व्यवस्थित करने जैसे उपाय सुझाए गए हैं।

दिल्ली में बाढ़ और जलभराव रोकने की तैयारी, सामने आई 8 नालों की गंभीर समस्या

किराड़ी में सीवर बना बड़ी चुनौती

किराड़ी सुलेमान नगर ड्रेन की स्थिति और गंभीर है। रिपोर्ट के मुताबिक, 106 अवैध और बिना सीवर वाली कॉलोनियों से घरेलू कचरा और गंदा पानी नाले तक पहुंचता है। इससे गाद जमा होती है और पानी बहने की क्षमता घटती है। यहां कलवर्ट हटाकर बड़े ह्यूम पाइप लगाने और गंदे पानी का मार्ग बदलने का सुझाव दिया गया है।

पाइपलाइन से हाईटेंशन लाइन तक अड़चन

एस्केप ड्रेन नंबर-1 में पानी की पाइपलाइन बहाव रोकती है, जबकि भारी गाद सफाई को मुश्किल बनाती है। पंखा रोड ड्रेन में अतिक्रमण और हाईटेंशन बिजली लाइनें चुनौती हैं। रिलीफ ड्रेन में भी मशीनों के लिए जगह कम है। इन जगहों पर बुनियादी ढांचे में बदलाव के साथ नियमित रखरखाव जरूरी होगा।

कचरा रोकना सबसे जरूरी

नसीरपुर और असोला ड्रेन में समस्या का बड़ा कारण आसपास पर्याप्त कूड़ा संग्रह केंद्रों की कमी बताई गई है। लोग और बाजारों से निकलने वाला कचरा सीधे नालों तक पहुंच जाता है। इसके लिए उचित कलेक्शन सेंटर और नालों पर स्टील जाली लगाने की सिफारिश की गई है।

बारिश से पहले कितना बदलेगा हाल?

MPD-2047 में सुझाए गए उपायों का असली परीक्षण भारी बारिश के दौरान होगा। सिर्फ नालों की सफाई कर देना पर्याप्त नहीं है। अतिक्रमण, सीवर, कचरा और एजेंसियों के बीच समन्वय जैसी समस्याओं पर एक साथ काम करना होगा। दिल्ली का जलभराव तभी कम होगा, जब नालों को बारिश के मौसम की मजबूरी नहीं, बल्कि सालभर की प्राथमिकता माना जाए।

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