मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर एलपीजी की कमी पैदा कर दी है, जिसका असर अब भारत के फूड सर्विस सेक्टर पर साफ दिख रहा है। Strait of Hormuz के रास्ते में बाधा के कारण भारत में एलपीजी आपूर्ति धीमी हो गई है। यदि यह तनाव लंबा खिंचता है, तो छोटे और बड़े रेस्टोरेंट, कैटरिंग कंपनियों और क्लाउड किचन संचालकों के लिए संचालन कठिन हो जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि संकट से कर्मचारियों की छंटनी और वेतन कटौती का खतरा भी बढ़ सकता है।
रेस्टोरेंट और कैटरिंग इंडस्ट्री पर संकट का असर
सरकार की ओर से एलपीजी आपूर्ति बढ़ाने का आश्वासन दिया गया है, लेकिन रेस्टोरेंट और कैटरिंग इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि उन्हें कॉमर्शियल सिलेंडरों की पर्याप्त संख्या नहीं मिल रही है। इसके चलते व्यवसायों को अपने दैनिक संचालन जारी रखना कठिन हो गया है। कई कारोबारी मानते हैं कि स्थिति अनिश्चित है और अभी तक यह साफ नहीं है कि संकट कब तक सामान्य होगा। The Economic Times से बातचीत में रेस्टोरेंट मालिक Anjan Chatterjee ने बताया कि पूरा सेक्टर फिलहाल हड़कंप जैसी स्थिति से गुजर रहा है।

छोटे व्यवसायियों पर सबसे ज्यादा दबाव
सबसे ज्यादा संकट छोटे रेस्टोरेंट, सड़क किनारे खाने-पीने की दुकानों, कैटरिंग कंपनियों और क्लाउड किचन संचालकों पर पड़ रहा है। इनमें से कई पहले ही अपने कारोबार को बंद कर चुके हैं। National Restaurant Association of India के अध्यक्ष Sagar Daryani ने कहा कि छोटे व्यवसाय नुकसान झेलने में सक्षम नहीं हैं और उन्हें मजबूरन कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ सकती है। छोटे कारोबारियों की मार सबसे पहले उनके निचले स्तर के कर्मचारियों पर पड़ेगी।
बड़े खिलाड़ी भी सुरक्षित नहीं
हालांकि बड़े रेस्टोरेंट और फूड सर्विस कंपनियां कुछ समय तक नुकसान सह सकती हैं, लेकिन इसका असर उनके ऑपरेशंस के कई पहलुओं पर पड़ेगा। इनमें किचन प्रोडक्शन, सप्लाई चेन और ग्राहकों को समय पर सेवा देने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मिडिल ईस्ट संकट लंबा खिंचता है और एलपीजी की आपूर्ति में सुधार नहीं होता, तो पूरे फूड सर्विस सेक्टर पर गंभीर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। सरकार और उद्योग को मिलकर जल्द समाधान निकालने की जरूरत है।

