मॉनसून सत्र के बीच संसद परिसर में विपक्षी नेताओं के बीच एक हल्के-फुल्के अंदाज में राजनीतिक बातचीत देखने को मिली। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के बीच हुई यह बातचीत अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है।
संसद परिसर में दिखा अलग अंदाज
गुरुवार को संसद परिसर में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी एक बैनर के साथ नजर आए। इसी दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी वहां मौजूद थे। माहौल राजनीतिक जरूर था, लेकिन बातचीत का अंदाज हल्का और मुस्कुराहट भरा दिखाई दिया। आसपास मौजूद अन्य सांसद भी इस दौरान मुस्कुराते नजर आए।
“20 गद्दारों” वाले बयान से शुरू हुई बातचीत
बातचीत की शुरुआत तब हुई जब कल्याण बनर्जी ने अपने बैनर की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह “20 गद्दारों” की तस्वीर लेकर आए हैं, जो संसद के अंदर बैठे हैं। यह टिप्पणी राजनीतिक संदर्भ में की गई, जिसके बाद प्रियंका गांधी ने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

प्रियंका गांधी का जवाब
प्रियंका गांधी ने कहा कि “कुछ लोग पहले हमारे यहां से आपके यहां गए और फिर बीजेपी में चले गए।” इस पर कल्याण बनर्जी ने जवाब देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की स्थिति कमजोर थी, इसलिए कई नेता टीएमसी में आए। उन्होंने यह भी कहा कि जो नेता कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में आए थे, वे कांग्रेस के टिकट पर सांसद बनकर नहीं पहुंचे थे। यह दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टिप्पणी थी।
पप्पू यादव की एंट्री से बढ़ी दिलचस्पी
इसी बीच निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने बातचीत में हिस्सा लेते हुए कहा, “तो वो कांग्रेसी हैं ना…” इस पर कल्याण बनर्जी ने हंसते हुए जवाब दिया, “अरे, कांग्रेसी तो हम लोग भी थे।” इसके बाद उन्होंने ममता बनर्जी के कांग्रेस से अलग होने का जिक्र किया। जवाब में प्रियंका गांधी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ममता बनर्जी का काफी सम्मान करते थे। इस पर कल्याण बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की पुरानी राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए अपनी बात रखी।
वीडियो बना चर्चा का विषय
इस पूरी बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद नेताओं के बीच सहज और सौहार्दपूर्ण संवाद ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। संसद में अक्सर तीखी बहसें देखने को मिलती हैं, लेकिन ऐसे हल्के पल लोकतांत्रिक संवाद का एक अलग पक्ष भी सामने लाते हैं।
संसद का मॉनसून सत्र जहां गंभीर मुद्दों पर बहस के लिए जाना जाता है, वहीं कभी-कभी नेताओं के बीच ऐसे अनौपचारिक और हल्के-फुल्के संवाद भी सुर्खियां बटोर लेते हैं। प्रियंका गांधी, कल्याण बनर्जी और पप्पू यादव की यह बातचीत राजनीतिक मतभेदों के बीच व्यक्तिगत सहजता और संवाद की संस्कृति की भी एक झलक पेश करती है।

