मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz के बंद होने की आशंका ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। दुनिया के लगभग 20% तेल की आपूर्ति इसी महत्वपूर्ण मार्ग से होती है, ऐसे में सप्लाई बाधित होने का खतरा कई देशों के लिए ऊर्जा संकट को गहरा कर रहा है। इसी स्थिति के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर तेजी से काम शुरू कर दिया है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस से LNG खरीद पर फोकस
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत Russia से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की खरीद को लेकर बातचीत कर रहा है। इसके लिए भारत ने अमेरिका से छूट (waiver) की मांग भी की है, ताकि किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध का असर इस डील पर न पड़े। अगर यह छूट मिलती है, तो भारत की गैस आपूर्ति को स्थिर करने में मदद मिल सकती है और घरेलू स्तर पर ऊर्जा की कमी काफी हद तक कम हो सकती है।
सरकार का फोकस इस समय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने पर है। यूक्रेन संघर्ष के बाद रूस से कई तरह के आयातों पर रोक लगी थी, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए इन प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार किया जा रहा है। विदेश मंत्रालय के संकेतों के मुताबिक भारत विभिन्न देशों के साथ बातचीत कर रहा है ताकि ऊर्जा आपूर्ति के स्रोत विविध बनाए जा सकें।

अमेरिका से बातचीत और संभावित छूट
भारत ने इस डील को आगे बढ़ाने के लिए United States प्रशासन से भी बातचीत शुरू की है। इसका उद्देश्य रूस से LNG खरीद के लिए आवश्यक नियामकीय छूट हासिल करना है। यदि यह बातचीत सफल रहती है, तो एक सप्ताह के भीतर समझौते पर मुहर लगने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस कदम के साथ पश्चिमी देशों की ओर से संभावित प्रतिबंधों का जोखिम भी बना हुआ है, जिसे भारत को संतुलित करना होगा।
मल्टी-सोर्स एनर्जी स्ट्रेटेजी पर भारत का जोर
मिडिल ईस्ट संकट को देखते हुए भारत ने अपनी ऊर्जा नीति को और अधिक आक्रामक और विविधतापूर्ण बनाया है। रूस से कच्चे तेल की खरीद पहले से ही जारी है, और हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार हाल के समय में भारत ने बड़ी मात्रा में रूसी तेल आयात किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में ऊर्जा की कमी न हो और कीमतों में अस्थिरता से बचा जा सके।
भारत की यह रणनीति “मल्टी-सोर्स एनर्जी” पर आधारित है, जिसमें अलग-अलग देशों से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। इससे न केवल घरेलू बाजार स्थिर रहता है बल्कि वैश्विक संकट के समय भी सप्लाई चेन प्रभावित नहीं होती। मौजूदा हालात में यह कदम भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

