बिहार की राजनीति एक बार फिर उस समय गरमा गई जब सचिवालय परिसर में शराब की खाली बोतल मिलने के मामले पर उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी से सवाल पूछा गया। जदयू प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जैसे ही पत्रकारों ने शराबबंदी कानून और सचिवालय में शराब की मौजूदगी को लेकर सवाल किया, डिप्टी सीएम का रवैया अचानक सख्त हो गया। उन्होंने सीधे मीडिया से पूछ लिया कि क्या उन्होंने कानून पढ़ा है और क्या वे उसका सही नाम जानते हैं। इस दौरान माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया और प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोग भी हैरान रह गए। बिहार में लंबे समय से लागू शराबबंदी कानून को लेकर विपक्ष पहले से ही सरकार को घेरता रहा है और अब सचिवालय जैसे संवेदनशील परिसर में शराब की बोतल मिलने से सरकार पर सवाल और तेज हो गए हैं।
‘शराबबंदी कानून’ शब्द पर उठाया सवाल, दिया बड़ा उदाहरण
विजय चौधरी ने पत्रकारों से कहा कि मीडिया लगातार ‘शराबबंदी कानून’ शब्द का इस्तेमाल कर रही है जबकि कानून का असली नाम ‘मद्य निषेध एवं उत्पाद शुल्क अधिनियम’ है। उन्होंने कहा कि इस कानून का मकसद शराब पीने, बेचने, रखने और उससे जुड़े अपराधों को रोकना है। डिप्टी सीएम ने अपनी बात को समझाने के लिए हत्या का उदाहरण दिया और कहा कि हत्या अपराध है और उसके लिए कानून बना है लेकिन कोई उसे ‘हत्याबंदी कानून’ नहीं कहता। उन्होंने जोर देकर कहा कि शराब से जुड़े मामलों में कार्रवाई करना ही कानून की असली भावना है। विजय चौधरी का यह बयान अब राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बन गया है। विपक्ष इसे सरकार की सफाई बता रहा है जबकि जदयू नेता इसे कानून की सही व्याख्या कह रहे हैं।

सरकार ने गिनाईं उपलब्धियां, विपक्ष ने फिर खोला मोर्चा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विजय चौधरी ने दावा किया कि बिहार में शराब से जुड़े मामलों में रिकॉर्ड संख्या में लोगों को सजा मिली है। उन्होंने कहा कि अदालतों के रिकॉर्ड इस बात का सबूत हैं कि सरकार कानून को सख्ती से लागू कर रही है। उनके मुताबिक यदि लगातार गिरफ्तारियां और सजा हो रही हैं तो इसे कानून की विफलता नहीं बल्कि उसकी सफलता माना जाना चाहिए। हालांकि विपक्ष इस तर्क से सहमत नहीं दिख रहा। सचिवालय परिसर में शराब की बोतल मिलने के बाद विपक्षी दल लगातार सरकार पर हमलावर हैं और सवाल उठा रहे हैं कि जब सरकार के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले परिसर में शराब पहुंच सकती है तो आम इलाकों की स्थिति क्या होगी। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या शराबबंदी कानून वास्तव में जमीन पर उतना प्रभावी है जितना सरकार दावा करती है।
तीखी बहस के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर चले गए विजय चौधरी
पत्रकारों और डिप्टी सीएम के बीच सवाल-जवाब का सिलसिला जैसे-जैसे आगे बढ़ा माहौल और गर्म होता चला गया। कई पत्रकार लगातार सचिवालय में शराब मिलने को लेकर जवाब मांगते रहे लेकिन विजय चौधरी इस मुद्दे पर ज्यादा देर तक चर्चा करने के मूड में नहीं दिखे। आखिरकार तीखी बहस के बीच उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म की और वहां से उठकर चले गए। उनके अचानक चले जाने के बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गईं। विपक्ष इसे सरकार की बेचैनी बता रहा है जबकि जदयू नेता कह रहे हैं कि मीडिया ने मुद्दे को गलत तरीके से पेश किया। बिहार में शराबबंदी को लेकर बहस पहले भी कई बार उठ चुकी है लेकिन इस बार सचिवालय परिसर से जुड़ा मामला सरकार के लिए नई चुनौती बनता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।

