Narendra Modi द्वारा सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपील के बाद अब धार्मिक और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। Avimukteshwaranand Saraswati ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जब सरकार जनता से मितव्ययिता की अपील कर रही है तो पहले खुद से इसकी शुरुआत करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार को पहले अपने 8000 करोड़ रुपये के विमान को बेचकर कम ईंधन खपत वाले साधनों का उपयोग करना चाहिए। उनका कहना था कि आर्थिक अनुशासन की शुरुआत सत्ता में बैठे लोगों से होनी चाहिए न कि केवल जनता से अपेक्षा की जाए। यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।
सोनभद्र यात्रा के दौरान शंकराचार्य ने जताई आर्थिक चिंताएं
Uttar Pradesh के सोनभद्र में अपनी गोविष्ट यात्रा के दौरान शंकराचार्य ने मीडिया से बातचीत में आर्थिक हालात पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा कमजोर हो रही है और ऐसे समय में सरकार को संतुलित आर्थिक नीति अपनानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मितव्ययिता के उपाय केवल आम जनता पर लागू नहीं होने चाहिए बल्कि शासन व्यवस्था में भी समान रूप से लागू होने चाहिए। उनके अनुसार यदि देश आर्थिक अनुशासन की ओर बढ़ना चाहता है तो इसकी शुरुआत शीर्ष स्तर से होनी चाहिए। उनके इस बयान ने सरकार की नीतियों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीएम मोदी की अपील और ऊर्जा बचत पर जोर
प्रधानमंत्री ने हाल ही में देशवासियों से अपील की थी कि पश्चिम एशिया संकट के चलते पेट्रोलियम उत्पादों का सीमित उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा था कि आयातित ईंधन का समझदारी से उपयोग करने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और वैश्विक संकट के असर को भी कम किया जा सकता है। इसके अलावा उन्होंने नागरिकों से गैर जरूरी विदेश यात्राओं से बचने और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कही थी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे मेट्रो बस और कारपूलिंग को अपनाएं तथा इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा दें ताकि ईंधन की खपत कम हो सके। इस अपील को सरकार की ऊर्जा नीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
सोना खरीद से लेकर खेती तक सरकार की व्यापक अपील
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील भी की थी। इसके साथ ही उन्होंने मेक इन इंडिया उत्पादों को प्राथमिकता देने और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की बात कही थी। उनका कहना था कि इससे घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम बढ़ेंगे। किसानों से भी उन्होंने रासायनिक खाद का उपयोग कम करने और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की थी। साथ ही डीजल पंप की जगह सौर ऊर्जा आधारित पंप लगाने पर जोर दिया गया था। सरकार की इन अपीलों को आर्थिक बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक व्यापक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है लेकिन अब शंकराचार्य की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को एक नई बहस में बदल दिया है।

