राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मंदिर में चढ़ावे के पैसे के हिसाब और ट्रस्ट के कामकाज को लेकर गंभीर चिंता जताई है। जयराम रमेश ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को घेरा। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले पर सरकार को अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए। देश के लोगों को पता चलना चाहिए कि आखिर दान के पैसों को लेकर सवाल क्यों उठ रहे हैं और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
कांग्रेस नेता ने अपने पोस्ट में चंदा चोरी और आस्था के साथ धोखा होने की बात कही। उन्होंने सवाल किया कि जब पहले ही कई तरह की चेतावनियां सामने आ चुकी थीं तो फिर कमियों को दूर करने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए गए। उन्होंने यह भी पूछा कि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है और पूरे मामले की जांच स्वतंत्र तरीके से क्यों नहीं कराई जा रही है।
जयराम रमेश ने अपनी बात के समर्थन में एक निजी ऑडिट फर्म की रिपोर्ट का भी हवाला दिया। उनके मुताबिक राम मंदिर ट्रस्ट बनने के कुछ महीने बाद नवंबर 2020 में इस फर्म ने ट्रस्ट को आंतरिक ऑडिट और जोखिम प्रबंधन को लेकर सुझाव दिए थे। ट्रस्ट का गठन 5 फरवरी 2020 को हुआ था।
जयराम रमेश के अनुसार ऑडिट फर्म ने ट्रस्ट के कामकाज में कई कमियों की ओर इशारा किया था। इनमें कर्मचारियों की जिम्मेदारियां साफ नहीं होना दान का व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं रखना और लेनदेन की दोबारा जांच की व्यवस्था कमजोर होना शामिल था। इसके अलावा बैंक खातों के मिलान और हिसाब किताब के लिए योग्य कर्मचारियों की कमी का भी जिक्र किया गया था।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि कंप्यूटर और डेटा की सुरक्षा को लेकर जरूरी इंतजाम क्यों नहीं किए गए और ऑडिट फर्म के सुझावों पर गंभीरता से काम क्यों नहीं हुआ।
फिलहाल जयराम रमेश के इन आरोपों और सवालों के बीच पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। हालांकि इन आरोपों के आधार पर चोरी साबित नहीं होती है। मामले में सच्चाई सामने आने के लिए संबंधित पक्षों का जवाब और जांच के नतीजे अहम होंगे।

