नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई बाढ़ और पहाड़ से गिरते पत्थरों ने तीर्थयात्रियों को मौत के मुहाने पर पहुंचा दिया था। बस छोड़कर कीचड़ भरी ढलान पर चढ़ते बुजुर्गों के लिए एक साड़ी उम्मीद की ऐसी डोर बनी, जिसने कई जिंदगियां बचा लीं।
अचानक बदल गया सफर का मंजर
चेन्नई के 21 तीर्थयात्रियों के लिए नेपाल यात्रा अचानक जिंदगी और मौत की जंग में बदल गई। रासुवा इलाके में बस से सफर के दौरान अचानक तेज आवाज सुनाई दी। इसके बाद पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने लगा, जबकि बाढ़ का पानी तेजी से सड़क और वाहनों की ओर बढ़ने लगा।
‘बम फटने जैसी आवाज आई’
तीर्थयात्रियों के मुताबिक, हालात इतने तेजी से बिगड़े कि कुछ समझने का मौका तक नहीं मिला। नेपाली ड्राइवर ने खतरा भांपते हुए सभी यात्रियों को बस से निकलकर ऊंचाई की ओर भागने को कहा। ज्यादातर यात्रियों की उम्र 50 साल से अधिक थी, इसलिए कीचड़ और फिसलन भरी ढलान पर चढ़ना बेहद मुश्किल था।

साड़ी बनी जिंदगी की डोर
मुश्किल घड़ी में समूह की सदस्य पूंगोडी ने अपनी साड़ी उतारकर उसे नीचे फंसे यात्रियों की ओर लटका दिया। यात्रियों ने साड़ी और वहां मौजूद एक केबल को पकड़कर धीरे-धीरे ऊपर चढ़ना शुरू किया। एक महिला खुद ऊपर नहीं चढ़ पा रही थी, तो साड़ी उसकी कमर से बांधी गई और बाकी लोगों ने उसे खींचकर सुरक्षित ऊपर पहुंचाया।
70-80 फीट ऊंची मलबे की लहर
यात्रियों ने बताया कि पत्थर और कीचड़ सुनामी की तरह उनकी ओर बढ़ रहे थे। एक यात्री के मुताबिक, मलबे की ऊंचाई करीब 70 से 80 फीट तक दिखाई दे रही थी। पहाड़ पर सुरक्षित रास्ता नहीं था और हर कदम पर फिसलने का खतरा बना हुआ था। इसी दौरान उन्होंने एक व्यक्ति को कीचड़ में फंसे मदद के लिए हाथ हिलाते भी देखा।
डेढ़ दिन बाद मिली सुरक्षित राह
आर्म्ड पुलिस फोर्स कैंप पहुंचने के बाद यात्रियों को पानी और बिस्कुट मिले। अगले दिन उन्हें झाड़ियों और संकरे रास्तों से करीब तीन घंटे पैदल चलना पड़ा। एक जगह गलत रास्ते पर जाने के बाद एक नेपाली व्यक्ति ने उन्हें सही दिशा दिखाई। आखिरकार सभी सैन्य हेलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित स्थान पहुंचे।
‘ऐसा लगा जैसे नया जीवन मिला’
काठमांडू से चेन्नई पहुंचे यात्रियों ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उन्हें लगा जैसे उन्हें नया जीवन मिला है। कई यात्रियों के पासपोर्ट और जरूरी दस्तावेज भी रास्ते में खो गए। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि प्राकृतिक आपदा के सामने इंसान कितना असहाय हो सकता है, लेकिन संकट की घड़ी में सूझबूझ, साथ और एक साधारण साड़ी भी जिंदगी की सबसे मजबूत डोर बन सकती है।

