BIHAR NEWS(Pockets news): बिहार MLC चुनाव के नतीजों के बाद एनडीए के अंदर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। जेडीयू की करारी हार के बाद शुरू हुआ विवाद अब बीजेपी और निर्दलीय विधान पार्षदों तक पहुंच गया है। इसी बीच बीजेपी के वरिष्ठ नेता और सांसद राजीव प्रताप रूडी के एक बयान ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। गठबंधन के अंदर पहले से चल रही नाराजगी के बीच उनके बयान को काफी अहम माना जा रहा है।
दरअसल विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों पर हुए चुनाव में जेडीयू को बड़ा झटका लगा। पार्टी अपने हिस्से की चार सीटों में से तीन पर हार गई। चुनाव परिणाम आने के बाद एनडीए के भीतर हार को लेकर चर्चा शुरू हुई। लेकिन मामला उस समय और बढ़ गया जब दो निर्दलीय विधान पार्षद वंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज को बीजेपी में शामिल कराने की कोशिशों की खबर सामने आई।
इस कदम से गठबंधन के अंदर नई नाराजगी पैदा हो गई। जेडीयू के खेमे में इसे लेकर सवाल उठने लगे क्योंकि दोनों निर्दलीय नेताओं की जीत के बाद बीजेपी की तरफ से उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि कानूनी अड़चनों के चलते दोनों नेता औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल नहीं हो सके। फिलहाल दोनों ने बीजेपी को समर्थन देने की बात कही है।
इसी बीच सांसद राजीव प्रताप रूडी के बयान ने विवाद को और हवा दे दी। उन्होंने राजपूत नेताओं को लेकर कहा कि बीजेपी नेतृत्व में किसी राजपूत नेता की इतनी हैसियत नहीं है कि उसके कहने पर कोई राजपूत चुनाव मैदान से हट जाए। उनके इस बयान को बिहार की जातीय राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
बिहार में राजपूत समाज की राजनीति में अहम भूमिका मानी जाती है। ऐसे में रूडी के बयान के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि बीजेपी और जेडीयू के नेता इस विवाद को कैसे संभालते हैं।
फिलहाल बिहार MLC चुनाव के बाद NDA में बढ़ती खींचतान ने यह साफ कर दिया है कि गठबंधन के अंदर सबकुछ सामान्य नहीं चल रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ता है या दोनों दल मिलकर कोई रास्ता निकालते हैं इस पर सबकी नजर रहेगी।

