Bangladesh News(Pockets news): भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में कपड़ा मजदूरों का प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुका है। वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे मजदूरों और पुलिस के बीच कई जगहों पर झड़प हुई है। हालात बिगड़ने के बाद भारत भी बांग्लादेश के घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत वहां की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।
बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग से जुड़े मजदूर लंबे समय से अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि मौजूदा न्यूनतम मासिक वेतन 12 हजार 500 रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये किया जाए। इसी मांग को लेकर ढाका के मीरपुर, आशुलिया, गाजीपुर और नारायणगंज जैसे इलाकों में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों की पुलिस और कानून व्यवस्था संभालने वाले जवानों से भिड़ंत हो गई।
हालात इतने बिगड़ गए कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ियों में आग लगा दी और सड़कों पर वाहनों में तोड़फोड़ की। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। कई जगहों पर लाठीचार्ज भी किया गया। इसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाते हुए अतिरिक्त अर्द्धसैनिक बलों को तैनात कर दिया।
बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के मुताबिक इन प्रदर्शनों का असर कपड़ा उद्योग पर भी पड़ा है। ढाका, गाजीपुर और मध्य मयमनसिंह में करीब 4 हजार पंजीकृत कपड़ा कारखानों में से 670 कारखानों को बंद करना पड़ा है। इस उद्योग में 40 लाख से ज्यादा मजदूर काम करते हैं और यह बांग्लादेश की कमाई का बड़ा जरिया है। चीन के बाद बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक देश है।
वहीं बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने आरोप लगाया है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग से जुड़े कुछ कारखाना मालिक भी अशांति फैलाने में शामिल हैं। हालांकि यह उनका आरोप है।
गाजीपुर में हालात संभालने के लिए बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश की 10 टुकड़ियां तैनात की गई हैं। उधर भारत सरकार भी पड़ोसी देश के हालात पर नजर रखे हुए है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि मजदूरों का आंदोलन कब शांत होता है और वहां की स्थिति कब सामान्य होती है।

