BIHAR NEWS(Pockets news): बिहार में बीजेपी की राजनीति इन दिनों कई सवालों के घेरे में है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार चल रही है और संगठन की कमान भी पार्टी के हाथ में है। इसके बावजूद बीजेपी को लगातार चुनावी झटके मिल रहे हैं। बिहार में बीजेपी के किले ध्वस्त होने की शुरुआत जिन सीटों से हुई है उन्होंने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिन इलाकों को बीजेपी अपना पक्का गढ़ मानती थी वहां भी अब मुकाबला बदलता दिखाई दे रहा है।
बीजेपी के लिए पहला बड़ा झटका भोजपुर बक्सर स्थानीय निकाय एमएलसी उपचुनाव में लगा था। मई 2026 में हुए इस चुनाव में आरजेडी के सोनू कुमार राय ने एनडीए के जेडीयू उम्मीदवार कन्हैया प्रसाद को 340 वोटों से हरा दिया था। इसके बाद अगस्त में पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। यह सीट लंबे समय से पार्टी के कब्जे में थी। यहां जन सुराज के प्रशांत किशोर ने जीत दर्ज कर बीजेपी के पुराने राजनीतिक समीकरण को बदल दिया।
इसके बाद पटना शिक्षक एमएलसी सीट का नतीजा भी बीजेपी के लिए परेशानी लेकर आया। करीब 30 साल से इस सीट पर कब्जा जमाए बैठे बीजेपी के नवल किशोर यादव को आरजेडी के डॉ संजीव कुमार सिंह ने 1057 वोटों से हरा दिया। दरभंगा में भी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के इलाके से आरजेडी के अनिल झा की जीत ने पार्टी को बड़ा संदेश दिया।
इन हार के पीछे कई वजहें मानी जा रही हैं। महंगाई बेरोजगारी और स्थानीय समस्याओं को लेकर लोगों में नाराजगी की चर्चा है। शहरी मतदाता अब सिर्फ पार्टी के नाम पर वोट देने के बजाय विकास शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को भी महत्व दे रहे हैं। वहीं सवर्ण मतदाताओं के एक हिस्से में भी नाराजगी की बात सामने आई है।
दूसरी तरफ प्रशांत किशोर की जन सुराज और आरजेडी जैसे दल बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। जेडीयू के साथ गठबंधन में रहते हुए बीजेपी के सामने अपनी अलग पहचान मजबूत करने की चुनौती भी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सम्राट चौधरी की अगुवाई में बीजेपी इन चुनौतियों से कैसे निपटती है। आने वाले समय में पार्टी अपने पुराने वोट बैंक को फिर से जोड़ पाती है या बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनते हैं यह देखना दिलचस्प होगा।

