बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार, 13 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में राजभवन मार्च का आह्वान किया गया है। AISA और RYA समेत वामपंथी छात्र एवं युवा संगठनों के इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवाओं के शामिल होने की संभावना है। हालांकि, जिला प्रशासन ने मार्च की अनुमति नहीं दी है और प्रदर्शनकारियों से गर्दनीबाग के निर्धारित धरना स्थल पर ही अपनी मांगें रखने की अपील की है।
पटना में सुबह 11 बजे शुरू होगा मार्च
SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर पटना में विरोध प्रदर्शन की तैयारी है। प्रदर्शनकारी सुबह 11 बजे गांधी मैदान स्थित जेपी गोलंबर से मार्च शुरू करके राजभवन तक जाने की योजना बना रहे हैं।
इस मार्च में वामपंथी छात्र संगठन AISA और युवा संगठन RYA के शामिल होने की संभावना है। आयोजकों की मंशा राज्यपाल से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपने की है। प्रदर्शन में वामपंथी संगठनों के प्रमुख नेताओं और बड़ी संख्या में युवाओं के जुटने की संभावना जताई गई है।
प्रशासन ने मार्च की अनुमति नहीं दी
पटना जिला प्रशासन के मुताबिक, राजभवन मार्च की अनुमति नहीं है। प्रशासन ने विरोध प्रदर्शन के लिए गर्दनीबाग स्थित निर्धारित धरना स्थल की अनुमति दी है। संगठनों से अपील की गई है कि वे अपनी मांगें शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से इसी स्थान पर रखें।

प्रशासन ने यातायात व्यवस्था, सार्वजनिक शांति और आम नागरिकों की सुविधा बनाए रखने में सहयोग करने को कहा है। साथ ही चेतावनी दी है कि निर्धारित स्थल के बाहर प्रदर्शन करने या जारी निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जा सकती है।
SIR और CEC को लेकर क्यों हो रहा है विरोध?
प्रदर्शनकारी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठा रहे हैं। मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इन मुद्दों पर जवाबदेही तय हो और उनकी शिकायतों पर विचार किया जाए। हालांकि, SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोपों और उनकी पुष्टि के बीच अंतर करना जरूरी है। इन सवालों पर चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
दिल्ली में भी निकला था INDIA गठबंधन का लोकतंत्र मार्च
पटना के प्रदर्शन से एक दिन पहले, 12 अक्टूबर को दिल्ली में भी SIR और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर विपक्षी दलों ने मार्च निकाला था। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुए इस प्रदर्शन में विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
मार्च में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, डी. राजा, एम.ए. बेबी, तेजस्वी यादव और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं की भागीदारी बताई गई। इस दौरान चुनावी प्रक्रिया और SIR से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त याचिका दायर किए जाने की भी जानकारी सामने आई।
पटना में यातायात और सुरक्षा पर रहेगी नजर
राजभवन मार्च के आह्वान और प्रशासन की चेतावनी के बीच पटना में सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था महत्वपूर्ण रहने वाली है। यदि प्रदर्शनकारी निर्धारित स्थल के बजाय दूसरे मार्ग पर मार्च करने की कोशिश करते हैं, तो प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जा सकती है।
आम लोगों को सलाह है कि वे यात्रा से पहले स्थानीय यातायात संबंधी अपडेट देखें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। प्रदर्शन के दौरान आगे क्या स्थिति बनती है, यह आयोजकों के फैसले और प्रशासन की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।

