बिहार सरकार ने युवाओं और मजदूरों को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन से रोकने की दिशा में बड़ा लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 2030 से पहले बिहार से बाहर मजदूरी करने जाने वाले लोगों को राज्य में ही रोजगार उपलब्ध कराने की बात कही है। इसके लिए उद्योग, MSME, डेटा सेंटर और औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
2030 तक बिहार में ही रोजगार देने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को मुजफ्फरपुर के मोतीपुर स्थित महवल औद्योगिक क्षेत्र में मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज क्लस्टर और साझा सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया। इस परियोजना पर 140.95 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, बिहार के करीब 12 लाख लोग आज भी रोजगार और मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 से पहले अधिक से अधिक लोगों को बिहार में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
उद्योगपतियों को निवेश के लिए किया आमंत्रित
सम्राट चौधरी ने उद्योगपतियों से बिहार में निवेश करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल निवेश प्रस्ताव हासिल करना नहीं, बल्कि वास्तविक औद्योगिक इकाइयां स्थापित करना है।
MSME, भारी उद्योग, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा और दूसरे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने की तैयारी है। सरकार निवेशकों के प्रस्तावों की समीक्षा कर जरूरत के अनुसार संबंधित क्षेत्र के लिए 30 दिनों के भीतर नीति तैयार करने की दिशा में काम करेगी।
डेटा सेंटर में 10 लाख करोड़ के निवेश की संभावना
बिहार सरकार ने 2030 से पहले राज्य में 1,000 मेगावाट क्षमता का डेटा सेंटर विकसित करने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इससे करीब 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना बन सकती है।
पटना में 12 मेगावाट क्षमता का डेटा सेंटर काम शुरू कर चुका है। इसके अलावा अगले पांच वर्षों में औद्योगिक क्षेत्रों को करीब 10,000 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

मुजफ्फरपुर में एयरपोर्ट और ड्राई पोर्ट की योजना
औद्योगिक विकास के साथ परिवहन और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को भी मजबूत करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री ने मुजफ्फरपुर के पताही में एयरपोर्ट निर्माण की दिशा में काम होने की जानकारी दी।
इसके अलावा स्थानीय उत्पादों की पैकेजिंग और मार्केटिंग के साथ ड्राई पोर्ट जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इससे बिहार के कारोबारियों को अपने उत्पाद देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
रैपिड रेल से कनेक्टिविटी बढ़ाने की तैयारी
सम्राट चौधरी ने मुजफ्फरपुर-पटना और पटना-गया के बीच रैपिड रेल चलाने की योजना पर काम करने की बात कही। सरकार का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योगों, व्यापार और रोजगार को गति मिल सकती है।
गया में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित करने की योजना है, जबकि मुजफ्फरपुर और दरभंगा में भी औद्योगिक क्लस्टर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
युवाओं को स्वरोजगार के लिए 10 लाख तक की मदद
सरकार युवाओं को नौकरी तलाशने के साथ-साथ उद्यमी बनाने पर भी जोर दे रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, युवाओं को उद्यम शुरू करने के लिए 10 लाख रुपये तक की सहायता दी जा रही है।
इसमें पांच लाख रुपये तक अनुदान और पांच लाख रुपये तक कम ब्याज पर ऋण देने की व्यवस्था बताई गई है। सरकार का लक्ष्य है कि इससे युवा अपना कारोबार शुरू करें और खुद के साथ दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार पैदा करें।
निष्कर्ष
बिहार सरकार का 2030 का रोजगार लक्ष्य उद्योग और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर आधारित है। औद्योगिक क्लस्टर, डेटा सेंटर, बेहतर बिजली आपूर्ति, एयरपोर्ट, ड्राई पोर्ट और रैपिड रेल जैसी योजनाओं के जरिए राज्य में निवेश और रोजगार बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। अब इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रस्तावित निवेश कितनी तेजी से वास्तविक परियोजनाओं और नौकरियों में बदलते हैं।

