नई दिल्ली: अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के बीच सोशल मीडिया पर जुबानी जंग तेज हो गई है। मिलबेन ने CJP पर अमेरिका से फंडिंग मिलने का आरोप लगाया है। वहीं, दिपके ने उनके बयान पर सवाल उठाते हुए भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप का मुद्दा उठाया।
मैरी मिलबेन ने CJP पर क्या आरोप लगाया?
मैरी मिलबेन ने सोशल मीडिया पोस्ट में भारतीय युवाओं से CJP के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की। उन्होंने दावा किया कि CJP को अमेरिका में मौजूद ऐसे डोनर्स से आर्थिक मदद मिल रही है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नेतृत्व के खिलाफ हैं।
मिलबेन ने अपने पोस्ट में भारतीय युवाओं से “चुप नहीं रहने” की अपील करते हुए CJP की गतिविधियों का विरोध करने को कहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ विदेशी डोनर्स दूसरे देशों में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करते हैं।
हालांकि, अमेरिका से CJP को कथित फंडिंग मिलने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी में नहीं है। इस दावे की पुष्टि के लिए आधिकारिक वित्तीय रिकॉर्ड या संबंधित एजेंसियों की जांच अहम होगी।
अभिजीत दिपके ने उठाया विदेशी हस्तक्षेप का सवाल
मैरी मिलबेन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने सवाल किया कि किसी विदेशी नागरिक को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसने दिया।

दिपके ने कहा कि भारत अपने आंतरिक मुद्दों से निपटने में सक्षम है और देश के मामलों में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।
मैरी मिलबेन ने दिया पलटवार
दिपके के सवाल पर मैरी मिलबेन ने भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि “सच सबको आजाद करता है” और दावा किया कि यदि CJP सफल नहीं होती है तो कथित अमेरिकी डोनर्स उसका साथ छोड़ देंगे।
उन्होंने दिपके से अपनी अमेरिकी शिक्षा और प्रतिभा का इस्तेमाल “सकारात्मक कामों” के लिए करने की अपील की। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए दावा किया कि मोदी को अमेरिकी समर्थन की जरूरत नहीं है।
सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा विवाद
मैरी मिलबेन और अभिजीत दिपके के बीच यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब CJP के प्रदर्शन और उसकी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर देश में पहले से ही बहस चल रही है।
एक तरफ मिलबेन ने CJP पर विदेशी फंडिंग का आरोप लगाया है, वहीं दिपके ने इसे भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप के रूप में पेश किया है। अब इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल यही है कि CJP को कथित विदेशी फंडिंग के दावे में वास्तविकता कितनी है और क्या इसके समर्थन में कोई आधिकारिक वित्तीय प्रमाण मौजूद है।

