उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी द्वारा रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर और बाहर PDA को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच मुरादाबाद से सपा के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने अखिलेश यादव के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में इस बार मुस्लिम प्रत्याशी नहीं बनाए जाने से उन्हें कोई परेशानी नहीं है और यह पार्टी अध्यक्ष की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। सपा ने दोनों उम्मीदवारों के नाम 30 सितंबर को घोषित किए थे और दोनों ने नामांकन भी दाखिल कर दिया है।
‘मुस्लिम प्रत्याशी न बनाना अखिलेश की रणनीति’
एसटी हसन से सवाल किया गया कि सपा ने किसी मुस्लिम नेता को राज्यसभा उम्मीदवार नहीं बनाया और ऐसे व्यक्ति को टिकट दिया जिसके पिता NDA के समर्थन से राज्यसभा सांसद रहे हैं, तो PDA का क्या हुआ?
इसके जवाब में एसटी हसन ने कहा कि इससे NDA को मजबूत करने की बात नहीं है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम को राज्यसभा न भेजे जाने से उन्हें तकलीफ नहीं है और अखिलेश यादव का यह फैसला किसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
एसटी हसन ने दावा किया कि अखिलेश यादव मुसलमानों को छोड़ नहीं सकते और उनके हितों को लेकर कोई जोखिम नहीं ले सकते। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष के फैसले के पीछे कोई रणनीतिक कारण जरूर होगा और आगे इसका असर दिखाई देगा।
धनराज नाथवानी के नाम पर उठे सवाल
सपा ने वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव के साथ धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाया है। नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े हैं और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। उनके पिता परिमल नाथवानी राज्यसभा सांसद हैं। इस चयन को लेकर सपा के PDA सामाजिक समीकरण पर सवाल उठाए गए हैं।
हालांकि, पार्टी ने अभी तीसरे उम्मीदवार के नाम की औपचारिक घोषणा नहीं की है। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान निर्धारित है और नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है।

ज्ञानेश कुमार पर एसटी हसन के गंभीर आरोप
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों पर भी एसटी हसन ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि एक-एक कमरे में बड़ी संख्या में वोट बनाए गए तथा लाखों लोगों के वोट हटाए गए।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की भी आलोचना करते हुए कहा कि अगर कोई इस बार वोट नहीं डाल सका तो अगली बार वोट डालने की बात कहना उचित नहीं है। एसटी हसन ने इसे लोकतंत्र से जुड़े गंभीर सवालों के रूप में पेश किया।
इन दावों को एसटी हसन के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित किसी भी आरोप को स्थापित तथ्य मानने से पहले आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया देखना जरूरी है।
इमरान मसूद पर ‘प्रेशर टैक्टिस’ का आरोप
इमरान मसूद को उत्तर प्रदेश कांग्रेस का कार्यवाहक अध्यक्ष बनाए जाने पर भी एसटी हसन ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे गठबंधन में अधिक सीटें हासिल करने के लिए दबाव बनाने की रणनीति बताया।
एसटी हसन ने कहा कि गठबंधन में पार्टियों को अपनी वास्तविक चुनावी क्षमता के अनुसार सीटों पर बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सीट बंटवारे का फैसला राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे शीर्ष नेता करेंगे।
एसटी हसन इससे पहले भी इमरान मसूद के बयानों को सीटों को लेकर दबाव की रणनीति बता चुके हैं। जुलाई में उन्होंने कहा था कि गठबंधन से जुड़े अंतिम फैसले शीर्ष नेतृत्व ही करेगा।
फ्लाईदुबई घटना पर भारतीय पायलट की तारीफ
फ्लाईदुबई FZ1073 में भारतीय पायलट स्मित मच्छार पर सह-पायलट द्वारा कथित हमले के मामले पर एसटी हसन ने भारतीय पायलट की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि पायलट ने अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रियों की जान बचाई।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, घटना के दौरान सह-पायलट ने स्मित मच्छार पर हमला किया और विमान तेजी से नीचे आया। पायलट और यात्रियों की कार्रवाई के बाद विमान को सुरक्षित रूप से उतारा गया। घटना में सवार यात्रियों की जान बच गई।
‘आतंकी हमला था या नहीं, जांच से पता चलेगा’
एसटी हसन ने कहा कि घटना आतंकवादी हमला था या किसी अन्य वजह से हुआ विवाद, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। उन्होंने अमेरिका और इजरायल की ओर से घटना को लेकर सामने आए बयानों पर भी सवाल उठाए और ईरान के संदर्भ में अपनी आशंका व्यक्त की।
हालांकि, फ्लाईदुबई मामले की जांच जारी है और उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में हमले का अंतिम मकसद अभी स्पष्ट नहीं बताया गया है। इसलिए ईरान से किसी कथित संबंध या घटना के पीछे किसी विशेष साजिश को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं कहा जा सकता।
एसटी हसन के बयानों में राज्यसभा चुनाव से लेकर यूपी में गठबंधन की राजनीति और फ्लाईदुबई घटना तक कई मुद्दे शामिल रहे। उन्होंने अखिलेश यादव के राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन को रणनीतिक फैसला बताया, इमरान मसूद पर गठबंधन में दबाव बनाने का आरोप लगाया और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। वहीं फ्लाईदुबई मामले में उन्होंने जांच पूरी होने तक निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की बात कही, जबकि घटना की आधिकारिक जांच अभी जारी है।

