बिहार में बाढ़ के बीच छपरा और सारण के हालात को लेकर पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि वह पिछले तीन दिनों से छपरा में हैं और राहत कार्यों के लिए 50 से ज्यादा जनरेटर लगाने पड़े हैं। उन्होंने कई इलाकों में भोजन, पानी और दूसरी जरूरी सुविधाओं की कमी का भी दावा किया।
छपरा में राहत व्यवस्था पर उठाए सवाल
पप्पू यादव ने कहा कि छपरा में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर है और कई इलाकों में बिजली समेत बुनियादी सुविधाओं की समस्या बनी हुई है। उनके मुताबिक, राहत कार्यों को चलाने के लिए उनकी टीम को बड़ी संख्या में जनरेटर लगाने पड़े हैं।
उन्होंने स्थानीय सांसदों और विधायकों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि जब लोग मुश्किल में हैं तो जनप्रतिनिधि कहां हैं। ये आरोप पप्पू यादव के हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से नहीं हुई है।
‘पांच दिन से लोग भूखे’ होने का दावा
सांसद ने दावा किया कि कई बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोग पिछले पांच दिनों से भोजन के संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई परिवारों को खाने-पीने के सामान के साथ-साथ दूसरी जरूरी चीजों की भी जरूरत है।
पप्पू यादव ने केंद्र और राज्य सरकार से बाढ़ प्रभावित लोगों तक तत्काल राहत पहुंचाने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि बाढ़ से कई परिवारों के मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं और कुछ जगहों पर करोड़ों रुपये की लागत वाले घर भी गिर गए हैं।

‘पटना और दिल्ली को पता नहीं छपरा डूब गया’
पप्पू यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पटना और दिल्ली में बैठे लोगों को छपरा की जमीनी स्थिति की पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने मौजूदा हालात को ‘जल प्रलय’ बताते हुए राहत व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए।
हालांकि, सरकारी स्तर पर भी राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। बिहार सरकार के मुताबिक, 3 अक्टूबर तक सारण समेत छह जिलों में करीब 4.93 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित थे। सारण में प्रभावित और सड़क संपर्क से कटे इलाकों तक IAF हेलीकॉप्टरों से 28 टन से अधिक खाद्य सामग्री के 5,600 से ज्यादा पैकेट पहुंचाए गए।
‘नेता जातिवाद के नाम पर वोट लेते हैं’
पप्पू यादव ने बिहार की राजनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि नेता जातिवाद के नाम पर वोट मांगते हैं, लेकिन आपदा के समय आम लोगों को पर्याप्त मदद नहीं मिलती।
उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए और जिस तरह दूसरे राज्यों में आपदा के दौरान राहत पहुंचाई जाती है, उसी तरह बिहार के बाढ़ प्रभावित लोगों की भी मदद होनी चाहिए। उन्होंने नेताओं के महंगी गाड़ियों में घूमने का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें आम जनता की परेशानियों का अंदाजा नहीं है।
बाढ़ के बीच राहत अभियान और राजनीतिक आरोप
सारण में गंडक नदी के बढ़े जलस्तर और तटबंधों को नुकसान के बाद कई गांव प्रभावित हुए हैं। प्रशासन और बचाव एजेंसियां राहत अभियान में जुटी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, सारण में राहत सामग्री के हवाई वितरण के दौरान एक व्यक्ति की मौत और कुछ लोगों के घायल होने की घटना भी सामने आई है, जिसकी परिस्थितियों की जांच की जा रही है।
इसी बीच पप्पू यादव बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचकर राहत कार्यों का जायजा लेने और लोगों की मदद करने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने छपरा में कई दिनों तक रहकर राहत अभियान जारी रखने की बात कही है।
बाढ़ की स्थिति के बीच उनके बयानों ने राहत व्यवस्था और सरकार की तैयारियों को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

