लखनऊ में समाजवादी पार्टी की बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़े कई मुद्दों पर बड़े चुनावी ऐलान किए। उन्होंने कहा कि 2027 में सपा की सरकार बनने पर पुरानी पेंशन योजना यानी OPS बहाल की जाएगी। इसके अलावा वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय, शिक्षामित्रों की पुरानी व्यवस्था, मदरसा सेवाओं और संस्कृत विद्यालयों से जुड़े मुद्दों पर भी कदम उठाने का वादा किया।
शिक्षकों और कर्मचारियों को लेकर कई घोषणाएं
समाजवादी पार्टी ने सोमवार को शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव को लेकर लखनऊ में बैठक की। बैठक के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी के विधायकों और एमएलसी के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई और कई सुझाव मिले।
इसी दौरान उन्होंने कर्मचारियों की पुरानी पेंशन की मांग का जिक्र करते हुए कहा कि यदि 2027 में सपा की सरकार बनती है तो OPS बहाल की जाएगी। अखिलेश के मुताबिक, इस संबंध में पार्टी अपने चुनावी घोषणापत्र में पूरा खाका पेश करेगी।
शिक्षामित्रों की पुरानी व्यवस्था बहाल करने का वादा
अखिलेश यादव ने शिक्षामित्रों को लेकर भी बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार बनने पर शिक्षामित्रों को पहले वाली व्यवस्था में दोबारा शिक्षक बनाए जाने का मौका दिया जाएगा।
यह मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है जब प्रदेश में शिक्षामित्रों की सेवा शर्तों और दूसरी मांगों को लेकर संगठन आंदोलन करते रहे हैं। वर्तमान में यूपी सरकार शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर चुकी है।
इसलिए अखिलेश की घोषणा मौजूदा व्यवस्था से अलग एक राजनीतिक वादा है, जिसका विस्तृत स्वरूप सपा के आगामी चुनावी घोषणापत्र में सामने आने की बात कही गई है।

वित्तविहीन शिक्षकों और मदरसों पर भी घोषणा
सपा अध्यक्ष ने वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय की व्यवस्था करने की बात कही। इसके साथ ही मदरसों की सेवाओं को बहाल करने और संस्कृत विद्यालयों से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने का भी वादा किया।
मदरसों से जुड़ा मुद्दा हाल के महीनों में भी राजनीतिक चर्चा में रहा है। अगस्त 2026 में उत्तर प्रदेश सरकार ने 2016 में सपा सरकार के दौरान पारित मदरसा वेतन विधेयक को विधानमंडल के दोनों सदनों से वापस ले लिया था।
बीजेपी पर नकल करने का लगाया आरोप
अखिलेश यादव ने अपने बयान के दौरान बीजेपी पर उनकी योजनाओं और मुद्दों की नकल करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने अपनी पिछली ‘भजन जैमिंग’ वाली टिप्पणी का जिक्र करते हुए भाजपा पर तंज कसा।
उन्होंने कहा कि सपा जिन मुद्दों को उठाती है, बाद में बीजेपी भी उन्हें अपनाती है। यह टिप्पणी अखिलेश यादव के राजनीतिक बयान का हिस्सा थी।
किसानों के मुआवजे का मुद्दा उठाया
अखिलेश यादव ने जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों के उचित मुआवजे की मांग भी उठाई। उन्होंने अलीगढ़-मुरादाबाद ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का उदाहरण देते हुए कहा कि किसानों को जमीन का मुआवजा बाजार मूल्य के आधार पर मिलना चाहिए।
उन्होंने सरकार की ओर से सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराने के दावों पर भी सवाल उठाए और जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की मांग की।
शिक्षक और स्नातक MLC चुनाव पर चर्चा
बैठक में आगामी शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति पर भी चर्चा हुई। अखिलेश यादव ने अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से पार्टी के समर्थन वाले उम्मीदवारों के नामों का उल्लेख किया।
उन्होंने मिर्जापुर-वाराणसी शिक्षक क्षेत्र से लाल बिहारी यादव, लखनऊ से सुशील कुमार और आगरा से प्रकाश चंद्र गुप्ता का नाम लिया। इसके अलावा गोरखपुर-फैजाबाद से कमलेश यादव, मुरादाबाद से दानिश अख्तर और लखनऊ स्नातक सीट से कांति सिंह का भी जिक्र किया।
राज्यसभा चुनाव को लेकर भी संकेत
अखिलेश यादव ने राज्यसभा चुनाव को लेकर भी कहा कि पार्टी के विधायकों के साथ चर्चा हुई है। उन्होंने संकेत दिया कि उम्मीदवारों के नाम सामने आने पर लोगों को आश्चर्य हो सकता है।
हालांकि, राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर अंतिम नाम और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी आधिकारिक जानकारी अलग चरण में सामने आएगी। इसलिए इस बयान को फिलहाल सपा अध्यक्ष के राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
EVM पर मायावती के बयान पर प्रतिक्रिया
मायावती के EVM से जुड़े बयान पर भी अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने EVM और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को साइबर फ्रॉड के एंगल से जोड़कर अपनी बात रखी।
EVM और चुनाव प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय से अलग-अलग दावे और सवाल सामने आते रहे हैं। ऐसे बयानों को संबंधित नेताओं के राजनीतिक दृष्टिकोण और दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अखिलेश यादव ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षकों, शिक्षामित्रों और कर्मचारियों से जुड़े कई मुद्दों को पार्टी के संभावित चुनावी एजेंडे में शामिल करने के संकेत दिए हैं। OPS बहाली, शिक्षामित्रों की पुरानी व्यवस्था, वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय और मदरसा सेवाओं को लेकर उनके ऐलान फिलहाल चुनावी वादे हैं। इन प्रस्तावों का विस्तृत स्वरूप सपा के आगामी चुनावी घोषणापत्र में सामने आने की बात कही गई है।

