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Thursday, October 15, 2026
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यूपी पशुपालन भर्ती घोटाले में रिटायर्ड IAS योगेश कुमार गिरफ्तार, EOW ने कसा शिकंजा

उत्तर प्रदेश के 2014 के पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती मामले में EOW की बड़ी कार्रवाई ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। रिटायर्ड IAS योगेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित भर्ती अनियमितताओं की कड़ियां किन-किन लोगों तक पहुंचती हैं।

2014 की भर्ती में हुआ था विवाद

मामला वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश के 17 मंडलों में हुई 1,198 पशुधन प्रसार अधिकारियों की भर्ती से जुड़ा है। इस भर्ती के लिए 2 फरवरी 2014 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। बाद में चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और नियमों की अनदेखी के आरोप सामने आए।

तत्कालीन प्रमुख सचिव थे योगेश कुमार

भर्ती प्रक्रिया के दौरान योगेश कुमार पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव पद पर तैनात थे। वह 1980 बैच के IAS अधिकारी हैं। EOW ने जांच में कथित अनियमितताओं से जुड़े सबूत मिलने के बाद उन्हें लखनऊ के गोमती नगर से गिरफ्तार किया।

OMR शीट से लेकर मेरिट तक सवाल

जांच में भर्ती प्रक्रिया के नियमों के पालन को लेकर सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, OMR उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच की जा रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चयन प्रक्रिया में किन अधिकारियों या अन्य लोगों की भूमिका थी।

तत्कालीन मंत्री राज किशोर सिंह का भी नाम

यह भर्ती उस समय की समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में हुई थी। उस दौरान राज किशोर सिंह पशुपालन मंत्री थे। रिपोर्टों के अनुसार, उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति से जुड़ी फाइल फिलहाल शासन स्तर पर लंबित है। राज किशोर सिंह बाद में 2024 में बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।

अब आगे क्या करेगी EOW?

योगेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी का अगला फोकस भर्ती प्रक्रिया में शामिल अन्य अधिकारियों और कथित लाभार्थियों की भूमिका पर हो सकता है। EOW यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि कथित अनियमितताएं किस स्तर पर हुईं और उनके पीछे कौन-कौन लोग थे।

गिरफ्तारी से बढ़ी सियासी हलचल

एक वरिष्ठ और सेवानिवृत्त IAS अधिकारी की गिरफ्तारी ने इस पुराने भर्ती मामले को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, जांच अभी जारी है और आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में होने वाली कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। अब सबकी नजर इस बात पर है कि EOW की जांच आगे किन नामों तक पहुंचती है।

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