दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होने का दावा करते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन करते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस दावे को गलत बताया है। पुलिस के मुताबिक, वायरल वीडियो शनिवार के किसी बड़े प्रदर्शन का नहीं, बल्कि पुरानी घटना का है।
दिल्ली पुलिस ने वायरल वीडियो पर दी सफाई
नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर वायरल वीडियो को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर पर शनिवार को बड़े प्रदर्शन के लाइव प्रसारण के तौर पर शेयर किया जा रहा वीडियो पुराना है।
पुलिस के अनुसार, वीडियो का शनिवार के किसी प्रदर्शन से संबंध नहीं है। सोशल मीडिया पर इसे मौजूदा घटना बताकर शेयर किया जा रहा था, जिससे लोगों के बीच भ्रम पैदा हो सकता था।
शनिवार के प्रदर्शन का दावा गलत
वायरल वीडियो में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी दिखाई दे रहे हैं। इसी दृश्य के आधार पर सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि शनिवार को जंतर-मंतर पर भारी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया।
दिल्ली पुलिस ने इस दावे का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि शनिवार को जंतर-मंतर पर ऐसा कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं हुआ, जैसा वायरल वीडियो में दिखाया जा रहा है।
इसलिए वीडियो को मौजूदा घटना का दृश्य बताकर शेयर करना भ्रामक है।

पुराने वीडियो को नए घटनाक्रम से जोड़ने का मामला
सोशल मीडिया पर अक्सर पुरानी तस्वीरों और वीडियो को नए घटनाक्रम से जोड़कर साझा किया जाता है। इस मामले में भी दिल्ली पुलिस के मुताबिक ऐसा ही हुआ।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संवेदनशील घटना से संबंधित वीडियो को शेयर करने से पहले उसकी तारीख, स्थान और मूल स्रोत की जांच जरूर करें।
सिर्फ वीडियो में भीड़ या प्रदर्शन दिखाई देने से यह साबित नहीं होता कि वह उसी दिन या उसी स्थान की घटना है।
गलत सूचना फैलाने पर कार्रवाई की चेतावनी
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया यूजर्स को गलत या भ्रामक जानकारी साझा करने को लेकर चेतावनी दी है। पुलिस के मुताबिक, जानबूझकर गलत सूचना या भ्रामक सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रदर्शन, कानून-व्यवस्था या अन्य संवेदनशील घटना को लेकर सोशल मीडिया पर सामने आने वाले दावों की पहले पुष्टि करें।
सोशल मीडिया यूजर्स के लिए क्या जरूरी है?
किसी वायरल वीडियो को शेयर करने से पहले कुछ बुनियादी बातों की जांच की जा सकती है। वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया, इसका मूल स्रोत क्या है और क्या किसी विश्वसनीय समाचार माध्यम या संबंधित सरकारी एजेंसी ने इसकी पुष्टि की है—इन सवालों के जवाब महत्वपूर्ण हैं।
खासकर प्रदर्शन और राजनीतिक घटनाओं से जुड़े वीडियो में संदर्भ की पुष्टि करना जरूरी है, क्योंकि पुराना वीडियो मौजूदा स्थिति की गलत तस्वीर पेश कर सकता है।
जंतर-मंतर पर शनिवार को बड़े प्रदर्शन का दावा करते हुए वायरल किया जा रहा वीडियो दिल्ली पुलिस के मुताबिक पुराना है। पुलिस ने ऐसे किसी बड़े प्रदर्शन के दावे से इनकार किया है और लोगों से भ्रामक जानकारी को आगे शेयर न करने की अपील की है। इसलिए वायरल वीडियो को मौजूदा घटना मानने से पहले उसके स्रोत और संदर्भ की पुष्टि करना जरूरी है।

