मध्य प्रदेश के मंडला जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के दौरान नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) गजानन नाफड़े लोकायुक्त के ट्रैप में फंस गए। जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने शुक्रवार को उन्हें नगर पालिका कार्यालय में 2 लाख रुपये की कथित रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा। आरोप है कि एक ठेकेदार के करीब 15 लाख रुपये के लंबित भुगतान को जारी कराने के बदले 4 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी।
15 लाख के लंबित भुगतान से जुड़ा है मामला
लोकायुक्त के अनुसार, जबलपुर निवासी ज्ञानचंद बेन सरकारी पंजीकृत ठेकेदार हैं। उनकी पत्नी मंजू बेन के नाम से पंजीकृत फर्म को मंडला नगर पालिका में LED लाइट और फिटकरी की सप्लाई का काम मिला था। वहीं ज्ञानचंद बेन को पाइप जॉइंट और वाटर कूलर की सप्लाई का कार्य मिला था।
शिकायत के मुताबिक, उनकी पत्नी की फर्म से जुड़े करीब 39.23 लाख रुपये के भुगतान का निपटारा हो चुका था, जबकि ज्ञानचंद बेन का लगभग 15 लाख रुपये का बिल लंबित था। इसी भुगतान को लेकर कथित तौर पर रिश्वत की मांग की गई।
4 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप
ठेकेदार की शिकायत के मुताबिक, CMO गजानन नाफड़े ने लंबित 15 लाख रुपये के भुगतान के एवज में 4 लाख रुपये देने की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने मामले का सत्यापन कराया।
लोकायुक्त के मुताबिक, सत्यापन के दौरान रिश्वत की कथित मांग की पुष्टि होने के बाद ट्रैप की योजना बनाई गई। तय हुआ कि 4 लाख रुपये में से पहली किस्त के तौर पर 2 लाख रुपये दिए जाएंगे।

नगर पालिका कार्यालय में बिछाया गया जाल
शुक्रवार को शिकायतकर्ता 2 लाख रुपये लेकर मंडला नगर पालिका कार्यालय पहुंचा। लोकायुक्त की टीम पहले से ही कार्रवाई के लिए मौजूद थी। जैसे ही शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर रकम CMO को दी, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए गजानन नाफड़े को पकड़ लिया।
लोकायुक्त टीम ने कथित रिश्वत की रकम बरामद कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की। कार्रवाई के बाद नगर पालिका कार्यालय में भी हलचल की स्थिति बन गई।
सर्किट हाउस ले जाकर दस्तावेजों की जांच
ट्रैप कार्रवाई के बाद लोकायुक्त की टीम CMO को नगर पालिका कार्यालय से सर्किट हाउस लेकर गई। वहां पंचनामा और दस्तावेजी कार्रवाई के साथ मामले से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच की गई।
मामले में लोकायुक्त पुलिस की आगे की जांच जारी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है।
शिकायत से ट्रैप तक ऐसे पहुंची कार्रवाई
इस पूरे मामले में पहले ठेकेदार ने लंबित भुगतान को लेकर कथित रिश्वत मांग की शिकायत लोकायुक्त पुलिस से की। इसके बाद शिकायत का सत्यापन कराया गया। सत्यापन में आरोपों की पुष्टि होने के बाद टीम ने ट्रैप तैयार किया और पहली किस्त के रूप में 2 लाख रुपये लेते समय कार्रवाई की।
हालांकि, रिश्वत मांगने और लेने से जुड़े आरोपों पर अंतिम कानूनी स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
आगे की जांच पर नजर
मंडला नगर पालिका में हुई इस कार्रवाई ने सरकारी भुगतान प्रक्रिया और भ्रष्टाचार की शिकायतों को लेकर फिर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल लोकायुक्त टीम दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। आगे की कार्रवाई में यह स्पष्ट होगा कि मामले में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं और आरोपी अधिकारी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।

