पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिख रही हैं। इसी बीच पूर्व प्रवर्तन निदेशालय (ED) डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह ने अमृतपाल सिंह के नेतृत्व वाले अकाली दल वारिस पंजाब दे का दामन थाम लिया है। उनके साथ पूर्व DSP बलविंदर सिंह सेखों भी पार्टी में शामिल हुए। दोनों की एंट्री को पार्टी के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
चंडीगढ़ में पार्टी में शामिल हुए निरंजन सिंह
निरंजन सिंह और बलविंदर सिंह सेखों बुधवार को चंडीगढ़ में पार्टी में शामिल हुए। इस मौके पर विधायक मनप्रीत सिंह अयाली, अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह और सांसद सरबजीत सिंह खालसा समेत पार्टी के अन्य नेता मौजूद रहे। मनप्रीत सिंह अयाली ने निरंजन सिंह का स्वागत करते हुए कहा कि उनके अनुभव से पार्टी को मजबूती मिलेगी।
निरंजन सिंह ने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या और भ्रष्टाचार को लेकर वह चिंतित हैं। उन्होंने वारिस पंजाब दे को नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाला संगठन बताते हुए कहा कि वह अपने अनुभव के आधार पर पंजाब के लिए योगदान देना चाहते हैं।
चुनाव लड़ने पर अभी फैसला नहीं
निरंजन सिंह के राजनीति में आने के बाद यह सवाल भी उठा कि क्या वह 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला नहीं किया है। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ना उनका प्राथमिक उद्देश्य नहीं है और वह अपने अनुभव के आधार पर योगदान देना चाहते हैं।
कुछ रिपोर्टों में उनके संभावित चुनाव लड़ने को लेकर अटकलें सामने आई हैं, लेकिन स्वयं निरंजन सिंह ने किसी सीट को लेकर निर्णय की पुष्टि नहीं की है। इसलिए फिलहाल इसे केवल राजनीतिक चर्चा के तौर पर देखा जा रहा है।

जगदीश भोला ड्रग केस की जांच से जुड़े रहे
निरंजन सिंह का ED में लंबा अनुभव रहा है। मई 2021 में सेवानिवृत्त होने से पहले उन्होंने पंजाब से जुड़े कई चर्चित मादक पदार्थ और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच की थी। इनमें जगदीश भोला ड्रग रैकेट से जुड़ा मामला भी शामिल था।
इस जांच के दौरान उन्होंने तत्कालीन वरिष्ठ नेताओं बिक्रम सिंह मजीठिया और सरवन सिंह फिल्लौर से भी पूछताछ की थी। बाद में उनका जालंधर से कोलकाता तबादला किया गया था, जिसे पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी गई और अदालत ने उस तबादले पर रोक लगा दी थी।
नशे और भ्रष्टाचार को लेकर उठाए सवाल
पार्टी में शामिल होने के बाद निरंजन सिंह ने पंजाब में नशे, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने इन समस्याओं के लिए अलग-अलग सरकारों और व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। ये उनके राजनीतिक रूप से पार्टी में शामिल होने के बाद दिए गए बयान हैं।
उन्होंने ED के कथित दुरुपयोग को लेकर पूछे गए सवाल पर भी कहा कि हर सरकार के स्तर पर एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कानून के अनुसार काम करने की बात कही।
अमृतपाल की पार्टी का राजनीतिक विस्तार
अकाली दल वारिस पंजाब दे का नेतृत्व खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह करते हैं। अमृतपाल सिंह वर्तमान में असम की जेल में बंद हैं और 2023 के अजनाला थाने पर हमले से जुड़े मामले में न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।
पार्टी में पूर्व ED अधिकारी और पूर्व पुलिस अधिकारी की एंट्री ऐसे समय हुई है, जब पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी गतिविधियां बढ़ा रहे हैं। ऐसे में वारिस पंजाब दे के नए चेहरों को लेकर राज्य की राजनीति में चर्चा होना स्वाभाविक है, लेकिन चुनावी प्रभाव का आकलन अभी भविष्य के राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।
पंजाब की राजनीति में नए समीकरणों पर नजर
निरंजन सिंह की एंट्री के साथ वारिस पंजाब दे ने अपने संगठन में प्रशासनिक और जांच से जुड़े अनुभव वाले चेहरों को जोड़ा है। पार्टी की ओर से इसे नशे और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर अपनी राजनीतिक मुहिम से जोड़ा जा रहा है।
2027 के चुनाव से पहले पंजाब में AAP, कांग्रेस, BJP, SAD और अन्य राजनीतिक ताकतों की गतिविधियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में उम्मीदवारों, मुद्दों और संभावित गठबंधनों को लेकर होने वाले फैसले राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को और स्पष्ट करेंगे।

