पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की राजनीति में संभावित गठजोड़ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को एक साथ लाने की कोशिशों की चर्चा है और इसमें समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की भूमिका बताई जा रही है। हालांकि, दोनों दलों ने अभी पंजाब में गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।
पंजाब में गठबंधन की चर्चा क्यों तेज हुई?
पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। राज्य विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल मार्च 2027 में समाप्त होगा और चुनाव आयोग ने अभी मतदान की तारीखों की घोषणा नहीं की है।
इसी बीच राज्य में राजनीतिक दलों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। आम आदमी पार्टी सरकार के सामने कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल समेत कई दल चुनावी मैदान तैयार कर रहे हैं।
हालिया रिपोर्टों में कांग्रेस और AAP के बीच संभावित तालमेल की चर्चा सामने आई है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट ने दावा किया कि अखिलेश यादव दोनों दलों को करीब लाने की कोशिश कर रहे हैं। यह फिलहाल रिपोर्ट और राजनीतिक चर्चा के स्तर पर है।
अखिलेश यादव की भूमिका पर क्यों हो रही चर्चा?
अखिलेश यादव के कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं के साथ राजनीतिक संबंधों को देखते हुए उनकी संभावित भूमिका की चर्चा की जा रही है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए साथ काम कर रहे हैं। अखिलेश ने हाल में रायबरेली से PDA रथयात्रा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के साथ गठबंधन जारी रहने की बात कही थी।
इसी पृष्ठभूमि में पंजाब में कांग्रेस और AAP के बीच किसी संभावित समझौते को लेकर भी राजनीतिक अटकलें लगाई जा रही हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अखिलेश यादव की ओर से पंजाब में दोनों दलों के बीच औपचारिक मध्यस्थता की कोई सार्वजनिक घोषणा सामने नहीं आई है।

कांग्रेस और AAP पहले भी साथ आ चुके हैं
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच सहयोग का इतिहास भी रहा है। 2013 में दिल्ली में AAP ने कांग्रेस के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई थी, जो 49 दिन चली थी।
2024 के लोकसभा चुनाव में भी दोनों दलों ने कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों के बंटवारे के तहत साथ चुनाव लड़ा था। दिल्ली, गुजरात, हरियाणा और गोवा में दोनों दलों के बीच सीट-शेयरिंग हुई थी।
चंडीगढ़ मेयर चुनाव में भी दोनों दलों के बीच तालमेल देखने को मिला था। हालांकि पंजाब विधानसभा चुनाव का राजनीतिक समीकरण इन परिस्थितियों से अलग है।
पंजाब में भाजपा का अभियान भी तेज
पंजाब में भाजपा ने भी 2027 के चुनाव को लेकर अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। अगस्त 2026 में भारतीय एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया था कि भाजपा संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने की तैयारी कर रही है और पार्टी के भीतर 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने को लेकर भी चर्चा हुई थी।
सितंबर में भाजपा ने ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ भी शुरू की, जिसे पार्टी ने राज्यभर में अपने अभियान के तौर पर आगे बढ़ाया। इस दौरान AAP और भाजपा नेताओं के बीच पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर लगातार राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी हुए हैं।
क्या कांग्रेस और AAP वास्तव में साथ आएंगे?
फिलहाल इसका जवाब आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है। पंजाब में कांग्रेस और AAP दोनों अलग-अलग राजनीतिक संगठन हैं और राज्य में दोनों के बीच लंबे समय से सीधा राजनीतिक मुकाबला भी रहा है।
इसलिए संभावित गठबंधन की चर्चा के बावजूद सीट बंटवारे, नेतृत्व, साझा कार्यक्रम और चुनावी रणनीति जैसे मुद्दों पर दोनों दलों का रुख महत्वपूर्ण होगा।
अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे संभावित राजनीतिक बातचीत और अटकल के रूप में ही देखा जा सकता है, न कि तय गठबंधन के रूप में।
2027 से पहले पंजाब में बदल रहे राजनीतिक समीकरण
पंजाब की 117 विधानसभा सीटों के लिए अगला चुनाव मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले होना है। चुनाव आयोग ने अभी आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया है।
ऐसे में आने वाले महीनों में कांग्रेस, AAP, भाजपा और अकाली दल की रणनीतियों में बदलाव देखने को मिल सकता है। संभावित विपक्षी तालमेल की चर्चा भी इसी व्यापक चुनावी तैयारी का हिस्सा है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस और AAP पंजाब में अलग-अलग चुनाव लड़ेंगी या किसी स्तर पर तालमेल का रास्ता तलाशेंगी। इसका स्पष्ट जवाब दोनों दलों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही सामने आएगा।

