विनेश फोगाट की कुश्ती में वापसी का विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। भारतीय कुश्ती महासंघ के दो शो-कॉज नोटिस और अनुशासनात्मक कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने WFI से अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।
WFI से निर्देश लेने को कहा
जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए भारतीय कुश्ती महासंघ के वकील को संगठन से निर्देश लेने को कहा। अदालत ने फिलहाल औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया है।
WFI को अगली सुनवाई में मामले पर अपना रुख अदालत के सामने रखने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
दो शो-कॉज नोटिस को दी चुनौती
विनेश फोगाट ने अपनी याचिका में WFI की ओर से 9 मई और 17 जून को जारी किए गए शो-कॉज नोटिस को चुनौती दी है। उन्होंने इन नोटिस के आधार पर शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं।

फोगाट का आरोप है कि यह कार्रवाई उनके खिलाफ लंबे समय से चले आ रहे कथित मनमाने और दुर्भावनापूर्ण रवैये का हिस्सा है।
मातृत्व के बाद वापसी बनी विवाद की वजह
याचिका में विनेश ने कहा है कि मां बनने के बाद वह प्रतिस्पर्धी कुश्ती में लौटना चाहती थीं। उनका कहना है कि वापसी के लिए उन्हें सामान्य खिलाड़ियों जैसी प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से गुजरने को कहा गया।
उनकी ओर से दलील दी गई कि मातृत्व के कारण जिस अवधि में वह प्रतियोगिताओं से बाहर थीं, उस दौरान हुए टूर्नामेंटों के प्रदर्शन को उनकी पात्रता तय करने का आधार बनाया गया।
‘गैरहाजिरी को मेरे खिलाफ इस्तेमाल किया गया’
विनेश के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि मातृत्व के बाद किसी खिलाड़ी की वापसी के लिए व्यावहारिक और सम्मानजनक व्यवस्था होनी चाहिए। उनके मुताबिक मौजूदा प्रक्रिया में उनकी गैरहाजिरी को ही उनके खिलाफ इस्तेमाल किया गया।
याचिका में यह भी कहा गया है कि खिलाड़ी की अनुपस्थिति का कारण मातृत्व था, इसलिए उस अवधि के प्रदर्शन को पात्रता के मूल्यांकन में आधार बनाना उचित नहीं है।
टेस्टिंग एजेंसी की मंजूरी का भी जिक्र
फोगाट ने अपनी याचिका में दावा किया है कि इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने उन्हें 1 जनवरी 2026 से प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की मंजूरी दे दी थी।
इसके बावजूद WFI की ओर से कार्रवाई किए जाने को उन्होंने अनुचित बताया है। अब अदालत के सामने इस पूरे विवाद में महासंघ का पक्ष महत्वपूर्ण होगा।
केंद्र और IOA से भी जवाब की उम्मीद
मामले में केंद्र सरकार और भारतीय ओलंपिक संघ को भी जवाब देने को कहा गया है। हालांकि अदालत ने फिलहाल औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया है।
अब 29 सितंबर की सुनवाई पर नजर रहेगी। यह मामला केवल एक खिलाड़ी की वापसी का विवाद नहीं, बल्कि मातृत्व के बाद महिला खिलाड़ियों के लिए सम्मानजनक और व्यावहारिक वापसी की व्यवस्था पर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।

