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Wednesday, September 2, 2026
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राम रहीम को फिर 21 दिन की फरलो, 9 साल में 17वीं बार जेल से बाहर; जानिए पैरोल और फरलो में अंतर

रेप के मामले में दोषी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर 21 दिन की फरलो मिल गई है। इसके साथ ही 2017 में सजा सुनाए जाने के बाद से वह 17वीं बार जेल से बाहर आएगा। इस साल जनवरी में उसे 40 दिन और मई में 30 दिन की पैरोल मिल चुकी है।

20 साल की सजा, अब तक 17वीं रिलीज

गुरमीत राम रहीम को 2017 में दो साध्वियों से रेप के मामले में दोषी ठहराया गया था और उसे 20 साल की सजा सुनाई गई थी। अब सजा के करीब 9 साल पूरे होने के बीच उसे 21 दिन की फरलो मिली है।

इस साल जनवरी में 40 दिन की पैरोल, मई में 30 दिन की पैरोल और अब 21 दिन की फरलो मिलने के बाद 2026 में उसकी कुल अस्थायी रिहाई 91 दिन हो गई है।

दावे के मुताबिक 2022, 2023, 2024 और 2025 में भी उसे हर साल पैरोल और फरलो के जरिए कुल 91 दिन तक जेल से बाहर रहने का अवसर मिला।

हरियाणा के कानून में क्या है प्रावधान?

हरियाणा सदाचारी बंदी (अस्थाई रिहाई) अधिनियम, 2022 के तहत कैदियों की पैरोल और फरलो से जुड़े नियम निर्धारित हैं।

राम रहीम को फिर 21 दिन की फरलो, 9 साल में 17वीं बार जेल से बाहर; जानिए पैरोल और फरलो में अंतर

सामान्य तौर पर कैदी को एक साल में कुल 10 सप्ताह यानी 70 दिन तक पैरोल अलग-अलग चरणों में मिल सकती है। इसके अलावा 21 दिन की फरलो का प्रावधान है। दोनों को मिलाकर साल में अधिकतम 91 दिन की अस्थायी रिहाई संभव होती है।

पैरोल और फरलो में क्या अंतर है?

पैरोल: पैरोल आम तौर पर किसी विशेष या जरूरी कारण के आधार पर दी जाती है। कैदी को अपनी वजह बतानी होती है और संबंधित प्राधिकारी या अदालत यह तय करती है कि वह कारण पैरोल के योग्य है या नहीं। पैरोल पर बाहर बिताया गया समय आम तौर पर सजा की अवधि में नहीं गिना जाता।

फरलो: फरलो कैदी के अच्छे आचरण के आधार पर दी जाती है और इसके लिए किसी विशेष कारण की जरूरत नहीं होती। इसकी अधिकतम अवधि सामान्यतः 21 दिन बताई गई है। फरलो पर बाहर बिताया गया समय सजा की अवधि में शामिल होता है।

क्या पैरोल कैदी का अधिकार है?

पैरोल को आम तौर पर कैदी का स्वतः अधिकार नहीं माना जाता। संबंधित प्रशासन या अदालत परिस्थितियों और नियमों के आधार पर फैसला करती है।

वहीं, फरलो को अच्छे आचरण से जुड़ी वैधानिक रियायत के रूप में देखा जाता है। हालांकि दोनों ही मामलों में अंतिम फैसला लागू कानून और संबंधित प्राधिकारी के आदेशों पर निर्भर करता है।

राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो मिलने का मुद्दा पहले भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहा है। अब 21 दिन की नई फरलो के बाद एक बार फिर इस पर सवाल उठ रहे हैं।

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