पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तस्वीर लगातार बदल रही है। बीजेपी के सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद अब बहुजन समाज पार्टी ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। मायावती ने घोषणा की है कि BSP पंजाब में किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और अपने संगठन व जनाधार के दम पर चुनाव मैदान में उतरेगी।
गठबंधन के बजाय अपने दम पर चुनाव लड़ेगी BSP
मायावती ने मंगलवार को पार्टी के केंद्रीय कैंप कार्यालय में पंजाब संगठन और जनाधार की समीक्षा के दौरान यह फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि पंजाब में भी बसपा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तरह अकेले चुनाव लड़ेगी।
बसपा प्रमुख के मुताबिक, चुनावी गठबंधन से सीटों और वोट प्रतिशत को नुकसान पहुंचने की स्थिति में कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी असर पड़ता है। इसलिए पार्टी अपने संगठन और जनाधार के आधार पर चुनावी तैयारी करेगी।
ईमानदार और मजबूत उम्मीदवारों पर जोर
मायावती ने पंजाब में ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारने पर जोर दिया जो कर्मठ और ईमानदार हों। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी के खिलाफ जनता के बीच बसपा की नीतियों को विकल्प के तौर पर पेश करने को कहा।
बसपा की ओर से ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ और आंबेडकरवादी विचारधारा को चुनावी अभियान का प्रमुख आधार बनाने की तैयारी है।

बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने के निर्देश
मायावती ने पंजाब में पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने संगठन की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करते हुए सामने आई कमियों को समयबद्ध तरीके से दूर करने को कहा।
उन्होंने गुरु रविदास, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और बसपा संस्थापक कांशीराम के विचारों को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया।
कांशीराम की पुण्यतिथि और 2027 की तैयारी
मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से 9 अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि पर होने वाले कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की। साथ ही 15 जनवरी 2027 को ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के अवसर पर आर्थिक सहयोग को पिछली बार से बेहतर करने का आह्वान किया।
उन्होंने इसे आंबेडकरवादी आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी बताया।
बीजेपी भी 117 सीटों पर अकेले उतरेगी
इससे पहले बीजेपी ने भी पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। बीजेपी संगठन महासचिव बीएल संतोष ने पार्टी की चुनावी रणनीति को लेकर यह जानकारी दी थी।
अब BSP के भी अकेले चुनाव लड़ने के फैसले से पंजाब में 2027 का विधानसभा मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला बीजेपी, BSP, कांग्रेस और अन्य दलों के बीच वोटों के समीकरण को किस तरह प्रभावित करता है।

