उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। विपक्ष जहां इस टिप्पणी की आलोचना कर रहा है, वहीं भारतीय जनता पार्टी के कई नेता उनके समर्थन में सामने आए हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बुधवार को कहा कि केशव प्रसाद मौर्य ने अपने बयान में “कुछ भी गलत नहीं कहा”। इसके बाद यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
क्या था केशव प्रसाद मौर्य का बयान?
पत्रकारों से बातचीत के दौरान केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था कि “मदरसा चाहे बांग्लादेश का हो, पाकिस्तान का हो या भारत का, वास्तव में देखा जाए तो मदरसा अघोषित तौर पर आतंकवादियों को पैदा करने की फैक्ट्री है।” इस बयान के सामने आने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
गिरिराज सिंह ने किया समर्थन
पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से जब इस बयान पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि केशव प्रसाद मौर्य ने “कुछ गलत नहीं कहा”। हालांकि उन्होंने अपने इस समर्थन के पक्ष में कोई विस्तृत तर्क नहीं दिया, लेकिन उनके बयान के बाद भाजपा और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया।

विपक्ष पर भी साधा निशाना
गिरिराज सिंह ने समाजवादी पार्टी द्वारा राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर किए गए विरोध प्रदर्शन पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विपक्ष पर साधु-संतों के अपमान का आरोप लगाया और कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेता राम मंदिर नहीं गए। उन्होंने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि यदि हिम्मत है तो किसी मुस्लिम संत के बारे में टिप्पणी करके दिखाएं।
राहुल गांधी पर भी किया हमला
विदेशी अंशदान नियमन (FCRA) से जुड़े विधेयक पर अमेरिकी सांसद की टिप्पणी के सवाल पर गिरिराज सिंह ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह कानून उन लोगों के खिलाफ है जो विदेश से कथित तौर पर अवैध धन लाकर भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी और विपक्ष पर राजनीतिक टिप्पणी भी की।
मदरसा संबंधी टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर भाजपा के नेता इस बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि विपक्ष और कई अन्य संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसे संवेदनशील विषयों पर सार्वजनिक बयान अक्सर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का कारण बनते हैं। आगे इस मुद्दे पर विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं और संभावित राजनीतिक घटनाक्रम चर्चा का केंद्र बने रह सकते हैं।

