उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अहिल्याबाई होल्कर के कार्य आज भी सुशासन और लोकहित की प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री ने लिखा कि उन्होंने मंदिरों घाटों और धर्मस्थलों के पुनर्निर्माण के साथ जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से एक आदर्श शासन व्यवस्था का उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके अनुसार अहिल्याबाई का जीवन समाज के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है जो आज भी विकास और संस्कृति संरक्षण की दिशा दिखाता है।
लोकमाता अहिल्याबाई के योगदान को किया गया याद
योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में कहा कि प्रजा के हित को सर्वोपरि रखते हुए अहिल्याबाई होल्कर ने विकास धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए असाधारण कार्य किए। उन्होंने कहा कि उनका शासन केवल प्रशासन तक सीमित नहीं था बल्कि समाज सुधार और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण का भी प्रतीक था। अहिल्याबाई ने अपने समय में जिस तरह से धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण और जनकल्याणकारी कार्यों को प्राथमिकता दी वह आज भी प्रेरणादायक माना जाता है। उनका जीवन सुशासन और लोकहित की एक मजबूत मिसाल के रूप में देखा जाता है।

मायावती ने भी दी श्रद्धांजलि और बताया प्रेरणास्रोत
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी अहिल्याबाई होल्कर को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्हें न्यायप्रिय धर्मनिरपेक्ष और लोक कल्याणकारी महान शासक बताया। मायावती ने कहा कि अहिल्याबाई ने अपने आदर्श सेवा भाव और जनहितकारी कार्यों से समाज को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने यह भी कहा कि उनका जीवन नारी शक्ति सुशासन सामाजिक समरसता और जनसेवा का प्रेरणा स्रोत है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन करता रहेगा।
अहिल्याबाई का ऐतिहासिक योगदान और आज की प्रासंगिकता
अठारहवीं शताब्दी के मालवा में होल्कर वंश की रानी अहिल्याबाई होल्कर को भारतीय इतिहास में एक महान शासक के रूप में याद किया जाता है। उनके शासन को असाधारण प्रशासनिक क्षमता और सामाजिक कल्याण के लिए जाना जाता है। उन्होंने धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण के साथ-साथ समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान पर भी विशेष ध्यान दिया। आज उनकी जयंती के अवसर पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है और उनके कार्यों को सुशासन और सांस्कृतिक विरासत का मजबूत आधार माना जा रहा है। उनका जीवन आज भी नेतृत्व और जनसेवा का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करता है।

