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Tuesday, July 21, 2026
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भाजपा विधायक संजय पाठक की पत्नी पर बड़ा आरोप जानें पूरा राजस्व चोरी मामला

मध्य प्रदेश के कटनी जिले में भाजपा विधायक संजय पाठक के परिवार पर राजस्व चोरी और रजिस्ट्री में फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप सामने आए हैं। विजयराघवगढ़ से विधायक संजय पाठक की पत्नी निधि पाठक पर आरोप है कि उन्होंने करोड़ों रुपये की व्यावसायिक जमीन की खरीद में स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क बचाने के लिए गलत तरीके अपनाए। जांच में सामने आया है कि जमीन की असली कीमत को कम दिखाकर रजिस्ट्री कराई गई और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। इस पूरे मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है।

दो हिस्सों में रजिस्ट्री कर बचाई गई स्टांप ड्यूटी

जांच रिपोर्ट के अनुसार महाराणा प्रताप वार्ड की महंगी व्यावसायिक जमीन का सौदा लगभग 3.86 करोड़ रुपये का था, लेकिन दस्तावेजों में इसकी कीमत केवल 96.38 लाख रुपये दिखाई गई। आरोप है कि इस जमीन को जानबूझकर दो हिस्सों में बांटकर अलग अलग रजिस्ट्री कराई गई ताकि स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क कम देना पड़े। खसरा नंबर 289/8, 289/9 और 289/23 की कुल 10400 वर्गफीट भूमि का सौदा चार दिनों के भीतर दो अलग रजिस्ट्रियों में पूरा किया गया। पंजीयन विभाग की जांच में यह पूरा लेनदेन संदिग्ध पाया गया।

भाजपा विधायक संजय पाठक की पत्नी पर बड़ा आरोप जानें पूरा राजस्व चोरी मामला

सरकारी जांच में करोड़ों के मूल्य अंतर का खुलासा

कलेक्टर ऑफ स्टांप की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जमीन का वास्तविक गाइडलाइन मूल्य 3.86 करोड़ रुपये था, जबकि दस्तावेजों में इसे लगभग चार गुना कम दिखाया गया। पहले हिस्से की रजिस्ट्री 20 दिसंबर 2021 को 9350 वर्गफीट जमीन के लिए 57 लाख रुपये में कराई गई, जबकि चार दिन बाद 1050 वर्गफीट हिस्से की रजिस्ट्री 39 लाख रुपये में की गई। जांच में यह भी सामने आया कि सड़क से जुड़ी महंगी जमीन को पीछे वाली कम कीमत वाली जमीन की तरह दिखाकर मूल्यांकन में हेरफेर किया गया। इससे सरकार को लाखों रुपये का नुकसान हुआ।

कोर्ट का आदेश और भारी जुर्माने की संभावना

मामले की सुनवाई के दौरान निधि पाठक को कई बार नोटिस भेजे गए लेकिन वे न तो किसी सुनवाई में उपस्थित हुईं और न ही दस्तावेजों का जवाब दिया। इसके बाद कलेक्टर ऑफ स्टांप ने स्टांप शुल्क चोरी को सही मानते हुए वसूली के आदेश जारी किए। रिपोर्ट के अनुसार 27.43 लाख रुपये स्टांप शुल्क और 2.90 लाख रुपये पंजीयन शुल्क की चोरी प्रमाणित हुई है। ब्याज और जुर्माने को जोड़ने के बाद कुल राशि लगभग 59 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। इस मामले के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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