back to top
Tuesday, August 18, 2026
Homeदेश'गिरफ्तार हो जाऊं या मौत हो जाए, फिर भी लौटूंगी'—शेख हसीना का...

‘गिरफ्तार हो जाऊं या मौत हो जाए, फिर भी लौटूंगी’—शेख हसीना का बड़ा बयान

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि गिरफ्तारी, जेल या मौत की सजा का खतरा होने के बावजूद वह दिसंबर तक अपने देश लौटने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी मातृभूमि में ही हर कानूनी और राजनीतिक चुनौती का सामना करना चाहती हैं।

देश लौटने को तैयार हैं शेख हसीना

नई दिल्ली में रह रहीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी AFP को ई-मेल के जरिए दिए जवाब में कहा कि वह दिसंबर तक बांग्लादेश लौटना चाहती हैं।

उन्होंने कहा, “मेरी हत्या हो सकती है। मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है। मुझे जेल भेजा जा सकता है। फिर भी मैं वापस जाना चाहती हूं, क्योंकि मेरे लोग मुझे बुला रहे हैं।” यह शेख हसीना का स्वयं का बयान है।

पहले भी लौटने की जताई थी इच्छा

इससे पहले समाचार एजेंसी Reuters को दिए एक साक्षात्कार में भी शेख हसीना ने कहा था कि वह और उनकी पार्टी के नेता निर्वासन से लौटकर बांग्लादेश की अदालतों का सामना करेंगे।

'गिरफ्तार हो जाऊं या मौत हो जाए, फिर भी लौटूंगी'—शेख हसीना का बड़ा बयान

उन्होंने यह भी कहा था कि यदि उनकी मृत्यु होती है तो वह अपने देश की धरती पर हो, जहां उनके माता-पिता दफन हैं। यह उनका व्यक्तिगत बयान है।

क्या है पूरा मामला?

बांग्लादेश में 2024 में सरकारी नौकरी में आरक्षण (कोटा) व्यवस्था के विरोध में छात्र आंदोलन शुरू हुआ था। बाद में यह व्यापक सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गया।

इन प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद छोड़ दिया और अगस्त 2024 में बांग्लादेश से निकलकर भारत आ गईं। तब से वह नई दिल्ली में रह रही हैं।

मौत की सजा और कानूनी कार्रवाई

सरकार बदलने के बाद बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना के खिलाफ कई मामलों की सुनवाई की। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें 2024 के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई थी।

उनके खिलाफ मानवता के विरुद्ध अपराधों समेत कई आरोपों में कानूनी कार्रवाई भी चल रही है। इन मामलों में अंतिम न्यायिक प्रक्रिया संबंधित अदालतों के अधीन है।

बांग्लादेश में बदला राजनीतिक परिदृश्य

शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। उनकी पार्टी अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया और कई नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई।

इसके बाद हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने जीत हासिल की और तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

शेख हसीना के दिसंबर तक बांग्लादेश लौटने के बयान ने वहां की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, उनकी वापसी के बाद क्या कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम होंगे, यह संबंधित अदालतों और बांग्लादेश की सरकारी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments