गुरुवार 2 अप्रैल के कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स BSE Sensex और NIFTY 50 दोनों ही लाल निशान पर खुले और दिनभर दबाव में कारोबार करते नजर आए। दोपहर करीब 12:30 बजे तक सेंसेक्स लगभग 1300 अंक तक टूट गया जबकि निफ्टी 50 में 415 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इस तेज गिरावट के कारण निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया और बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ता गया। शुरुआती कारोबार में ही आई इस कमजोरी ने पूरे दिन के ट्रेडिंग सेंटिमेंट को प्रभावित किया और निवेशकों के पोर्टफोलियो पर इसका सीधा असर देखने को मिला।
निवेशकों को करीब 10 लाख करोड़ का नुकसान
इस गिरावट का सबसे बड़ा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार करीब 10 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर लगभग 412 लाख करोड़ रुपये तक आ गया। इसका मतलब है कि एक ही दिन में निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट दर्ज की गई। इस स्थिति ने खासकर रिटेल और शॉर्ट टर्म निवेशकों को प्रभावित किया। बाजार की इस गिरावट ने यह संकेत दिया कि वैश्विक और घरेलू दोनों स्तर पर मौजूद अनिश्चितताएं निवेशकों के विश्वास को कमजोर कर रही हैं।

वैश्विक और राजनीतिक कारणों का असर
बाजार में आई गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण भी जिम्मेदार माने जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के हालिया बयानों ने मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के संकेत दिए हैं जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। ईरान को लेकर संभावित कार्रवाई की अटकलों ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी एक बड़ा कारण है। हाल के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एक ही दिन में हजारों करोड़ रुपये निकाल लिए और यह सिलसिला कई ट्रेडिंग सेशनों से जारी है। इससे बाजार को जरूरी सपोर्ट नहीं मिल पा रहा है और दबाव बना हुआ है।
क्रूड ऑयल और ग्लोबल मार्केट की कमजोरी का असर
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल भी बाजार गिरावट का प्रमुख कारण बना। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 6 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड भी 5 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। तेल की कीमतों में इस तेजी से महंगाई बढ़ने की आशंका बनती है जो आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा एशियाई और वैश्विक बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और चीन व हांगकांग के बाजारों में गिरावट ने निवेशकों की धारणा को और कमजोर किया। इन सभी कारणों के संयुक्त प्रभाव से भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई और निवेशकों के लिए यह दिन काफी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।

