सावन की पहली मूसलाधार बारिश ने पानीपत के ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया में जल निकासी व्यवस्था की स्थिति उजागर कर दी। भारी बारिश के बाद नालों से पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों और फिर कई फैक्ट्रियों के अंदर पहुंच गया। इससे तैयार माल, पैकिंग सामग्री और कच्चा माल पानी में भीग गया। उद्योगपतियों का दावा है कि इस जलभराव से कई इकाइयों को लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक का नुकसान हुआ है।
फैक्ट्रियों में घुसा बारिश का पानी
मंगलवार सुबह हुई तेज बारिश के बाद ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया की कई सड़कें जलमग्न हो गईं। पानी का बहाव सीधे औद्योगिक इकाइयों में पहुंचने से कई स्थानों पर उत्पादन कार्य प्रभावित हुआ। उद्योगपतियों का कहना है कि निर्यात (एक्सपोर्ट) के लिए तैयार शिपमेंट और पैक किए गए उत्पाद भी पानी की चपेट में आकर खराब हो गए।
उद्योगपतियों ने लगाए गंभीर आरोप
हरियाणा चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन विनोद धमीजा ने आरोप लगाया कि उद्योगपति लंबे समय से नालों की सफाई और बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया। उनके अनुसार, जाम नालों के कारण बारिश का पानी सीधे फैक्ट्री परिसर में घुस गया, जिससे उनकी इकाई को प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक 60 से 70 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।

उत्पादन प्रभावित, लाखों का नुकसान
साहिल इंटरनेशनल के निदेशक साहिल ने भी दावा किया कि फैक्ट्री में जलभराव के कारण उत्पादन पूरी तरह प्रभावित हुआ। उन्होंने बताया कि परिसर में पानी भरने से करीब 50 से 60 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि नालों में प्लास्टिक और कचरा जमा होने के कारण पानी की निकासी नहीं हो सकी, जिससे पूरे औद्योगिक क्षेत्र में जलभराव की स्थिति बन गई।
स्थायी समाधान की मांग
बारिश के बाद घंटों तक ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया में जलभराव और यातायात बाधित रहने की बात सामने आई। उद्योगपतियों ने प्रशासन से नियमित नाला सफाई, प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम और स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो हर बारिश उद्योगों के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।
पानीपत के औद्योगिक क्षेत्र में हुई जलभराव की इस घटना ने शहरी आधारभूत ढांचे और जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उद्योगपतियों ने नुकसान का दावा किया है, जबकि प्रशासन की ओर से मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया और संभावित राहत उपायों का इंतजार है। आने वाले समय में ड्रेनेज व्यवस्था में सुधार इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

