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Monday, April 20, 2026
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8वें सेंट्रल पे कमीशन में कर्मचारियों की बड़ी मांगों को लेकर अभी भी सस्पेंस बरकरार

केंद्र ने पिछले नवंबर में 8वें सेंट्रल पे कमीशन के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी किए थे। इसके बाद कई कर्मचारी प्रतिनिधि संस्थाओं ने चिंता जताई कि आखिरी ढांचे में उनकी कई जरूरी मांगें शामिल नहीं हैं। अब जैसे-जैसे कमीशन की प्रक्रिया तेज हो रही है, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें भी बढ़ रही हैं। इस बार चर्चा सिर्फ फिटमेंट फैक्टर या बेसिक पे तक सीमित नहीं है। कर्मचारी संगठनों ने सुझाव दिया है कि फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह किया जाए, खासकर उन कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए जो CGHS नेटवर्क से बाहर हैं।

कर्मचारी संगठनों की नाराजगी और प्रमुख मांगें

कर्मचारी संगठनों ने जनवरी 2025 से ही सरकार के सामने अपनी मांगें रखनी शुरू की थीं। मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस ने भी NC-JCM स्टाफ साइड से ToR पर सुझाव मांगे थे। स्टाफ साइड का कहना है कि फिटमेंट फैक्टर, OPS की बहाली और मेडिकल सुविधाओं जैसे अहम मुद्दों पर आखिरी ToR में स्पष्ट जानकारी नहीं है। हाल ही में 8वें पे कमीशन को जनपथ स्थित चंद्रलोक बिल्डिंग में दफ्तर दिया गया है। कमीशन की चेयरमैन पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना प्रकाश देसाई हैं। इससे कमीशन के कामकाज के शुरू होने का संकेत माना जा रहा है।

8वें सेंट्रल पे कमीशन में कर्मचारियों की बड़ी मांगों को लेकर अभी भी सस्पेंस बरकरार

ड्राफ्टिंग कमेटी और FMA पर बहस

8वें पे कमीशन की ड्राफ्टिंग कमेटी ने 25 फरवरी से करीब एक हफ्ते तक मीटिंग कर कर्मचारी और पेंशनर्स की मांगों को अंतिम रूप दिया। इस ड्राफ्ट में लगभग 1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़ी कई अहम मांगें शामिल हैं। सबसे ज्यादा चर्चा FMA को बढ़ाने की मांग पर हो रही है। नॉन-CGHS इलाकों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए 1,000 रुपये की राशि काफी नहीं है। कर्मचारी संगठन का तर्क है कि हेल्थ खर्च तेजी से बढ़ा है, इसलिए मेडिकल अलाउंस को भी जमीन की हकीकत के हिसाब से बढ़ाया जाना चाहिए।

अब सबकी नजर कमीशन की सिफारिशों पर

अब सभी की निगाहें 8वें पे कमीशन की आधिकारिक कार्रवाई और सिफारिशों पर हैं। अगर FMA को 20,000 रुपये प्रति महीने तक बढ़ाने जैसी मांगें मान ली जाती हैं, तो यह नॉन-CGHS इलाकों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। कर्मचारी संगठन फिलहाल अपने एजेंडा को और मजबूत करने में लगे हैं। आने वाले महीनों में साफ होगा कि सरकार इन मांगों को कितनी हद तक मानती है और 8वां पे कमीशन कर्मचारियों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है।

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