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Sunday, August 31, 2025
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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से नाराजगी जताई, जमानत

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों पर गंभीर रुख अपनाया है। इस मामले में मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई, न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। पीठ ने विशेष रूप से उस मामले पर चिंता व्यक्त की, जिसमें एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई 21 बार टल चुकी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों का निपटारा त्वरित होना चाहिए और इसके लिए हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से व्यक्तिगत रूप से ध्यान देने का अनुरोध किया।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता का महत्व

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता संवैधानिक रूप से सुरक्षित है। इसके उल्लंघन को गंभीरता से देखा जाता है और न्यायालय हमेशा इसके संरक्षण के लिए तत्पर रहता है। बार-बार जमानत याचिका की सुनवाई टलने से आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित होती है और यह न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न उठाता है। न्यायालय ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों को प्राथमिकता से निपटाना आवश्यक है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की कार्यप्रणाली पर नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की कार्यप्रणाली पर भी चिंता जताई। पीठ ने कहा कि बार-बार सुनवाई टलना न्यायिक तंत्र की सुचारू प्रक्रिया में बाधा डालता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह स्थिति न्याय के लिए हानिकारक है और इससे आम नागरिकों में न्यायिक प्रणाली पर भरोसा कम होता है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि ऐसे मामलों पर व्यक्तिगत रूप से निगरानी रखें और सुनिश्चित करें कि जमानत याचिकाओं का त्वरित निपटारा हो।

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से नाराजगी जताई, जमानत
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से नाराजगी जताई, जमानत

अगली सुनवाई और जमानत का निर्णय

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल आरोपी को जमानत देने से इनकार किया, लेकिन कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई में हाई कोर्ट को मामले का निस्तारण करना होगा। कोर्ट ने कहा कि बार-बार सुनवाई टलने की स्थितियों को रोका जाना चाहिए और उच्च न्यायालय इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए। इससे न केवल आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा होगी बल्कि न्यायिक प्रणाली की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट का संदेश

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के माध्यम से पूरे देश के न्यायिक तंत्र के लिए एक संदेश भी दिया। पीठ ने कहा कि किसी भी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता संवैधानिक अधिकार है और इसे प्रभावित करने वाली कोई भी देरी न्यायिक प्रक्रिया की गंभीर विफलता है। कोर्ट ने बार-बार यह बात दोहराई कि ऐसे मामलों को शीघ्रता से सुना और निपटाया जाना चाहिए। यह कदम न्यायपालिका द्वारा नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामले न्यायिक प्राथमिकता में रहने चाहिए। इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस मामले में जमानत याचिका पर 21 बार सुनवाई टलने से पीठ नाखुश रही। कोर्ट ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से व्यक्तिगत रूप से निगरानी रखने का अनुरोध किया। अगली सुनवाई में इस मामले का त्वरित निपटारा होना अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख न्यायपालिका द्वारा नागरिकों की संवैधानिक स्वतंत्रता की सुरक्षा के प्रति गंभीरता को प्रदर्शित करता है।

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