मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का सीधा असर अब वैश्विक समुद्री कारोबार पर दिखाई देने लगा है। समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम के कारण जहाजों के लिए बीमा लेना लगातार महंगा होता जा रहा है। कई बीमा कंपनियां अब जोखिम अधिक होने के चलते कवरेज देने से भी बच रही हैं। इसका नतीजा यह है कि शिपिंग गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और कंपनियों के सामने संचालन को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। खासकर होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर स्थिति और भी संवेदनशील बन गई है।
होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा वॉर रिस्क प्रीमियम
होर्मुज स्ट्रेट, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम रास्ता है, वहां से गुजरने वाले जहाजों के लिए वॉर रिस्क प्रीमियम में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। पहले यह प्रीमियम लगभग 0.2 से 0.25 प्रतिशत के आसपास था, जो अब बढ़कर 1 प्रतिशत या उससे अधिक हो गया है। इस बढ़ोतरी ने शिपिंग कंपनियों के लिए ऑपरेशन खर्च को काफी बढ़ा दिया है। एक बड़े ऑयल टैंकर की कीमत हजारों करोड़ रुपये तक होने के कारण बीमा लागत में मामूली प्रतिशत का बदलाव भी करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ डाल देता है।

ऑपरेशनल खर्च और रूट बदलाव की मजबूरी
बढ़ते बीमा खर्च और जोखिम के चलते कई शिपिंग कंपनियां अब वैकल्पिक और सुरक्षित रूट अपनाने को मजबूर हैं। कई कंपनियां होर्मुज स्ट्रेट के बजाय अफ्रीका के लंबे समुद्री मार्ग से अपने जहाज भेज रही हैं। इससे यात्रा में 10 से 15 दिन का अतिरिक्त समय लग रहा है। इस दौरान ईंधन की खपत बढ़ती है और अन्य ऑपरेशनल खर्च भी काफी बढ़ जाते हैं। यह स्थिति कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर डाल रही है और सप्लाई चेन को भी प्रभावित कर रही है।
बीमा न मिलने से बढ़ी गंभीर चुनौती
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार खाड़ी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में बीमा कंपनियां अब जहाजों को वॉर रिस्क कवर देने से भी इनकार कर रही हैं। यह स्थिति शिपिंग उद्योग के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण बन गई है क्योंकि बिना बीमा के जहाजों का संचालन संभव नहीं होता। कार्गो की फाइनेंसिंग पोर्ट एंट्री और कॉन्ट्रैक्ट पूरे करने के लिए बीमा अनिवार्य होता है। ऐसे में जहाज मालिकों के पास सीमित विकल्प रह गए हैं। या तो वे महंगे प्रीमियम पर बीमा खरीदें या फिर जोखिम भरे रूट से दूरी बनाएं। इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक शिपिंग सेक्टर में अनिश्चितता और लागत दोनों को बढ़ा दिया है।

